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चाबहार बंदरगाह के विकास का ठेका भारत ने चीन की कंपनी को दिया

Tue, 22 Aug 2017 09:14 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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बंदरगाह
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ईरान के साथ बनी सहमति के आधार पर भारत ने चाबहार बंदरगाह की विकास की परियोजना शुरू कर दी है। केंद्रीय सड़क एवं पोत परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार यह बंदरगाह 12-18 महीने में आपरेशनल हो जाएगा।
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गडकरी इसी महीने के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति हसन रुहानी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर ईरान गए थे और बंदरगाह के रास्ते में आ रहे रोड़े को दूर करके आए हैं। लेकिन उच्चपदस्थ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार ने चाबहार बंदरगाह के विकास का बड़ा चीन की कंपनी को सौंप दिया है।

भारत चाबहार बंदरगाह का विकास ईरान से संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ मध्य एशिया में अपनी पहुंच के लिए करना चाहता है। ताकि अफगानिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, ताजकिस्तान समेत अन्य देशों में जाने के लिए हमारी पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म हो जाए।
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दूसरे इस बंदरगाह के विकास का प्रमुख कारण चीन की पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक पहुंचने की काट के तौर पर है। ग्वादर मलक्का जल डमरू के मुहाने पर स्थित है और इससे कुछ दूर आगे ईरान का चाबहार बंदरगाह रणनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण स्थान पर है। लेकिन इसके बरअक्स बंदरगाह के विकास में चीन की कंपनी को शामिल करना चौंका रहा है।

वह भी तब जबकि 1962 के बाद भारत और चीन के रिश्ते जून 2017 से बहुत नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। चीन की सेना भूटान के कब्जे वाले क्षेत्र डोकलाम में सडक़ निर्माण के लिए जमी हैं और भूटान को दी गई सुरक्षा की गारंटी के अन्तर्गत भारत चीन के सैनिकों का विरोध कर रहा है। दोनों देशों में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

क्यों दिया ठेका
इस बारे में विदेश मंत्रालय के अफसर कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि चाबहार को विकसित करने के लिए जिस स्तर की क्रेन चाहिए, वह भारत के पास नहीं है। यूरोपीय देशों के पास क्रेन है, लेकिन ईरान पर प्रतिबंध के कारण यूरोपीय कंपनियां आगे नहीं आ रही हैं। हालांकि विकल्प के तौर पर सिंगापुर की कंपनी भी है, लेकिन नई दिल्ली ने इसके लिए बीजिंग की कंपनी को चुना है।
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