Bhagwat: गुजरात विश्वविद्यालय में एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने भारतीयों से कहा कि वे देश की प्राचीन ज्ञान प्रणाली में अपने संदेह और विश्वास की कमी को दूर करें और इसके बजाय यह पता लगाने के लिए शोध करें कि क्या प्रासंगिक है और इसे सभी के साथ साझा करें।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत का गठन विश्व कल्याण के लिए हुआ है और देश को अपनी ताकत और प्रतिष्ठा में वृद्धि के बीच अपने ज्ञान को एक कर्तव्य के रूप में साझा करना चाहिए।
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गुजरात विश्वविद्यालय में एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने भारतीयों से कहा कि वे देश की प्राचीन ज्ञान प्रणाली में अपने संदेह और विश्वास की कमी को दूर करें और इसके बजाय यह पता लगाने के लिए शोध करें कि क्या प्रासंगिक है और इसे सभी के साथ साझा करें।
उन्होंने कहा, 'हमारे राष्ट्र का गठन हमारे पूर्वजों की तपस्या के कारण हुआ था, जो दुनिया का कल्याण चाहते थे, इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम ज्ञान साझा करें।' अहमदाबाद स्थित आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक पुर्नउत्थान विद्यापीठ की ओर से तैयार प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और संबंधित विषयों के 1,051 खंडों का विमोचन करने के बाद भागवत ने ये बातें कही।
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उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की ताकत और प्रतिष्ठा बढ़ने के बावजूद यह जरूरी है कि हम अपनी ज्ञान प्रणाली के साथ-साथ दुनिया में मौजूद ज्ञान की समीक्षा करें ताकि ज्ञान के नए स्तरों का पता लगाया जा सके और इसे दुनिया को नए रूप में पेश किया जा सके।
भागवत ने कहा कि भारतीयों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए काम करने से पहले खुद ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, क्योंकि बहुत से लोग "संदेह में रहते हैं और इस ज्ञान पर अविश्वास रखते हैं।" आरएसएस के सरसंघचालक ने दावा किया कि वास्तविक ज्ञान वाले लोग हैं लेकिन हम उनपर अविश्वास करते हैं क्योंकि हमारे मस्तिष्क को इस तरह आकार दिया गया है।