57 साल के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला कूटनीति के माहिर माहिर हैं। 29 जनवरी 2020 को पूर्व विदेश सचिव विजय केशव गोखले का स्थान लेने वाले श्रृंगला इससे पहले अमेरिका में भारत के राजदूत थे। बताते हैं कि अमेरिका में राजदूत रहते हुए श्रृंगला ने न केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से बेहतर तालमेल और रोड मैप तैयार कराने में सहायता की, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देने में सफल रहे।
विदेश सचिव बनने के बाद भी क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय तमाम चुनौतियों से तालमेल बनाकर उसे साधने में जुटे हैं। यह एक संयोग है कि 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को विदेश मंत्री के रूप में मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया है। कूटनीति के गलियारे में माना जाता है कि इसे विदेश नीति को प्रभावी बनाने में काफी बल मिला है।
सूटकेस में बड़ी सफलता लेकर लौट रहे हैं श्रृंगला
श्रृंगला ने नेपाल को भारत का सबसे अहम दोस्त और विकास का साझीदार बताया है। उन्होंने कोविड-19 की वैक्सीन आते ही नेपाल को वरीयता के आधार पर इसे उपलब्ध कराने का वादा किया है। नेपाल के विदेश सचिव भारत राज पौडियाल के निमंत्रण पर नेपाल पहुंचे श्रृंगला समकक्ष से बातचीत में सीमा पर जल्द बाड़ लगाने के कार्य पर सहमति जताई है।
उन्होंने नेपाल में सीमा से जुड़े से लेकर अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। सबसे अहम रहा कि नेपाल ने भारतीय विदेश सचिव का भरपूर सम्मान किया। वह प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की। उन्होंने नेपाल में बौद्ध मठ का उद्घाटन दिया। कुल मिलाकर कहने का अर्थ है कि भारत और नेपाल के बीच तालमेल, सामंजस्य, सद्भाव बढऩे की अच्छी खबर लेकर वह भारत लौट रहे हैं। इसे एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।