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Terror Module: आतंकी संगठन PAK के, लेकिन नकाब जुदा; जानें नए टेरर मॉड्यूल क्यों बन रहे भारत के लिए चुनौती

Mon, 01 Jun 2026 01:52 PM IST
Devesh Tripathi आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार भारत में आतंकवाद का स्वरूप बदल रहा है, जहां नए मॉड्यूल किसी बड़े प्रतिबंधित संगठन से सीधे जुड़े बिना उनकी विचारधाराओं से प्रेरित होकर सक्रिय हो रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी संरचनाएं जांच और निगरानी को अधिक जटिल बनाती हैं, क्योंकि इनके पीछे की फंडिंग, नेटवर्क और संचालन प्रणाली स्पष्ट नहीं होती।
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पाकिस्तान की नई आतंकी साजिश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत के सामने आतंकवाद का एक नया और उभरता हुआ खतरा सामने आ रहा है, जिसमें आतंकी संगठन सीधे तौर पर किसी हमले में शामिल नहीं होते हैं। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में जिन आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है, उनका लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट (आईएस) या जैश-ए-मोहम्मद जैसे बड़े संगठनों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं मिला है।

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सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये मॉड्यूल या तो इन संगठनों से प्रेरित हैं या उनसे किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी साजिश है, जिससे वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी से बचा रह सके।

पाकिस्तान की पहले से जुदा और नई आतंकी साजिश
अधिकारियों का कहना है कि लश्कर, अल-कायदा, आईएस और जैश जैसे संगठन अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और भारत द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित किए जा चुके हैं। ऐसे संगठनों के नेटवर्क पर नजर रखना और उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसी के चलते पाकिस्तान अब इस तरह की अलग और नई आतंकी साजिश अपना रहा है।
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एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान अलग खालिस्तान की मांग करने वाले समूहों के मामले में भी इसी साजिश का इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने गैंगस्टर नेटवर्क का सहारा लिया है। आईएसआई ने जानबूझकर बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) जैसे संगठनों की प्रत्यक्ष भूमिका को सीमित रखा है। बीकेआई एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, इसलिए उसके नेटवर्क की निगरानी अपेक्षाकृत आसान है।

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में आने से बचने के लिए लगाई तरकीब
खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि यह सब जानते हैं कि पाकिस्तान इन आतंकी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देता है। एक ओर वह भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखना चाहता है। वहीं, दूसरी ओर वह एफएटीएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निगरानी में भी नहीं आना चाहता।

अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान पहले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रह चुका है और बड़ी मुश्किल से उससे बाहर निकला था। अगर वह फिर से इस सूची में शामिल होता है तो उसकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भारत में नए मॉड्यूल खड़े करने की कोशिश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि व्यावहारिक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान की सेना और आईएसआई भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं होने देंगे। उनका उद्देश्य भारत पर लगातार दबाव बनाए रखना है। इसके लिए आईएसआई भारत में अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर नए मॉड्यूल खड़े करने की कोशिश कर रही है।

भारत के लिए कैसे चुनौती बन रहे नए आतंकी मॉड्यूल?
अधिकारियों के मुताबिक युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने वाले साहित्य और प्रचार सामग्री पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि भारत में बनने वाला कोई भी नया आतंकी समूह पाकिस्तान के समर्थन से संचालित हो सकता है, लेकिन उसमें पाकिस्तान की सीधी भूमिका दिखाई नहीं देगी।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि भविष्य में भारत को ऐसे मॉड्यूलों से और अधिक निपटना पड़ सकता है। ये किसी एक संगठन की विचारधारा तक सीमित नहीं होंगे। कुछ मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद, इस्लामिक स्टेट या अल-कायदा से प्रेरणा ले सकते हैं, जबकि कुछ कई संगठनों की विचारधाराओं का मिश्रण अपना सकते हैं।

हाल ही में पुलिस ने ऐसे एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो अल-कायदा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों से प्रभावित था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए सुराग तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है और कई बार जांच भ्रम की स्थिति के कारण ठहर भी सकती है।

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जांच एजेंसियों को कहां होती है समस्या?
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर कोई हमला लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन के नाम पर होता है और उसकी जिम्मेदारी भी वही संगठन लेते हैं, तो जांच एजेंसियों के पास शुरुआत करने के लिए एक आधार होता है। उनके काम करने का तरीका, नेटवर्क और फंडिंग से जुड़े पैटर्न पहले से उपलब्ध होते हैं।

हालांकि नए मॉड्यूल उन संगठनों की रणनीति और कार्यशैली का पूरी तरह पालन नहीं करते जिनसे वे प्रेरित होते हैं। यही कारण है कि ऐसे मामलों की जांच की शुरुआत ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।

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