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Kerala: वीना विजयन और सीएमआरएल की बढ़ीं मुश्किलें, उच्च न्यायालय ने ईडी जांच पर रोक लगाने से किया इनकार

Mon, 01 Jun 2026 01:34 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, कोच्चि

सार

केरल हाईकोर्ट ने  सीएमआरएल वित्तीय लेनदेन मामले में ईडी की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। वीना विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक से जुड़े इस मामले में अदालत ने कहा कि जांच जारी रहनी चाहिए। कंपनी अपने दस्तावेज पेश कर सकती है।

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केरल हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस और उसकी मालिक वीना विजयन के लिए एक बड़ा झटका लगा है। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को विवादास्पद सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस फैसले से केंद्रीय एजेंसी को अपनी जांच जारी रखने का रास्ता साफ हो गया।

विधानसभा चुनाव में था अहम मुद्दा

पिछले सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के आवास सहित 10 स्थानों पर ईडी की छापेमारी हुई। इसके बाद सीएमआरएल ने राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था, जहां उनकी बेटी वीना रहती हैं। अदालत का यह फैसला एक ऐसे मामले में आया है जो लगभग दो वर्षों से केरल के राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहा है। हाल ही में राज्यें में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है।

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शुरुआती चरण में जांच रोकने से इनकार करके उच्च न्यायालय ने ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्यवाही करने में एक महत्वपूर्ण कानूनी लाभ दिया है। कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने अपनी याचिका के अंतिम निपटारे तक आगे की जांच कार्रवाई के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया कि चल रही जांच को रोकना सही नहीं है। एजेंसी को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी।

उच्च न्यायालय ने क्या सवाल किया?
सुनवाई के दौरान, सीएमआरएल ने तर्क दिया कि ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कंपनी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज होने से पहले ही कार्यवाही शुरू कर दी थी। इसमें आगे यह तर्क दिया गया कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की जांच एक राजनीतिक नेता की ओर सोे दायर शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सवाल उठाया कि जांच को अपना पूरा काम करने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए।

'संबंधित दस्तावेजों को पेश करने पर आपत्ति क्यों'

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यह देखते हुए कि सीएमआरएल अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए अधिकारियों के समक्ष सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश कर सकती है। अदालत ने टिप्पणी की कि अगर अंत में कोई गलत काम नहीं पाया जाता है, तो कंपनी को क्लीन चिट मिल जाएगी। पीठ ने यह भी पूछा कि कंपनी एक्सालॉजिक के साथ अपने लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों को पेश करने पर आपत्ति क्यों जता रही है। इस मामले की जड़ें आयकर निपटान बोर्ड के उन निष्कर्षों में निहित हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि सीएमआरएल द्वारा एक्सालॉजिक को बिना संबंधित सेवाएं की भुगतान किए गए थे।

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ये निष्कर्ष ईडी की ओर से संभावित मनी लॉन्ड्रिंग उल्लंघनों की जांच करते समय उपयोग की जाने वाली सामग्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उच्च न्यायालय ने सोमवार को विस्तृत बहस की कार्यवाही की, लेकिन संकेत दिया कि आदेश जारी होने की संभावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा सीएमआरएल की ओर से पेश हुए। वहीं,  प्रवर्तन निदेशालय का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किया।

 

अंतरिम राहत न मिलने से ईडी के लिए मामले से जुड़े व्यक्तियों को तलब करने और उनसे पूछताछ करने सहित अपनी जांच को तेज करने का रास्ता खुला रह जाता है। इसमें शामिल भारी राजनीतिक दांव-पेच को देखते हुए, कानूनी और राजनीतिक दोनों हलकों द्वारा कार्यवाही पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। अंतिम परिणाम से केरल के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

 

 

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