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शांति प्रक्रिया: अफगानिस्तान में व्यापक संघर्ष विराम पर भारत का जोर, तालिबान से भी किया संपर्क

Thu, 24 Jun 2021 02:41 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • कतर के विशेष दूत ने कहा- भारतीय अधिकारियों ने दोहा में की बातचीत
  • भविष्य में तालिबान की अफगानिस्तान की अहम भूमिका होगी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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भारत पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान में व्यापक पैमाने पर हो रही हिंसा के बीच व्यापक संघर्ष विराम पर जोर दे रहा है। साथ ही ऐसी खबरें भी आ रही है कि अफगान शांति प्रक्रिया के नए सिरे से आगे बढ़ने की पृष्ठभूमि में उसने पहली बार तालिबान से संपर्क किया है। भारत कभी भी तालिबान से सीधे बातचीत के लिए राजी नहीं रहा है।

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दरअसल 11 सितंबर तक अमेरिका अपनी सेना को अफगानिस्तान से पूरी तरह से हटा लेगा। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान एक बार फिर ताकतवर होता जा रहा है और उसने कई इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया है।

इसको देखते हुए भारत ने तालिबान से संपर्क किया है। अफगान शांति प्रक्रिया में तेजी आने के बीच कतर के विशेष दूत मुतलाक बिन मजीद अल कहतानी ने कहा कि भारतीय अधिकारियों ने दोहा में तालिबान प्रतिनिधियों से मुलाकात की है।
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उन्होंने कहा कि भारत की ओर से तालिबान के साथ बातचीत इसलिए नहीं की जा रही कि अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन आ जाएगा। हां इतना जरूर है कि भविष्य में तालिबान की अफगानिस्तान की अहम भूमिका होगी। यही कारण है कि हर पक्ष बातचीत को तैयार दिख रहा है।

उन्होंने कहा कि मेरा जहां तक मानना है कि भारतीय अधिकारियों की तालिबान प्रतिनिधियों से उनकी बातचीत भविष्य को ध्यान में रखकर की गई है। आने वाले समय में तालिबान अफगानिस्तान के नीति निर्धारण में अहम भूमिका अदा करने वाला है। मेरी सभी पक्षों से अपील है कि पूरे मामले का शांतिपूर्ण कोई हल निकले।

19 साल से चल रही जंग को खत्म करने के लिए तालिबान और अफगान सरकार के बीच कतर की राजधानी दोहा में सीधे बातचीत चल रही है। इस शांति प्रक्रिया में कतर अहम भूमिका निभा रहा है।

अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा से चिंतित भारत
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में फिर से बढ़ती हिंसा को लेकर चिंतित है और उसने शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने के लिए व्यापक संघर्ष विराम पर जोर दिया है।

विदेशमंत्री एस जयशंकर हाल ही में कुवैत और केन्या के दौरे के दौरान दोहा में भी ठहरे थे। दोहा में कतर नेताओं के साथ वार्ता में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी बात हुई थी। साथ ही जयशंकर ने अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीजाद से भी मुलाकात की थी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए सही मायनों में देश के अंदर और आसपास दोहरी शांति की आवश्यकता है। हिंसा में तत्काल कमी और असैन्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत अफगानिस्तान में स्थायी और व्यापक संघर्ष विराम चाहता है।

अजित डोभाल की है नजर
ऐसा बताया जा रहा है कि भारतीय अधिकारियों की बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के दिशानिर्देश पर आगे बढ़ रही है। हालांकि सरकार की ओर इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। तालिबान की ओर से भी बातचीत पर कुछ नहीं कहा गया है। भारत की अफगानिस्तान की सरकार से बातचीत की प्राथमिकता है लेकिन जमीन पर कोई बदलाव होता है, इसको ध्यान में रखकर तालिबान से भी बातचीत हो रही है।

भारत का सबसे अधिक निवेश
भारत ने भारत ने अफगानिस्तान में अब तक 3 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह राशि रूस, चीन, ईरान जैसे देशों के निवेश से कहीं अधिक है। भारत ने अफगानिस्तान के हेरात में करीब 2040 करोड़ की लागत से सलमा बांध बनवाया है, जिसमें भारत के 1500 इंजीनियरों ने भी अपना योगदान दिया है। अफगानिस्तान की पूरी पावर ग्रिड भारत की खड़ी की हुई है।

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