राकांपा नेता व आवास निर्माण मंत्री जितेन्द्र आव्हाड ने कैंसर के मरीजों व उनके परिजनों को रहने के लिए महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) का 100 फ्लैट टाटा मेमोरियल हास्पिटल को स्थानांतरित किया था।
महाराष्ट्र की महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार महाफूट की ओर आगे बढ़ रही है। सरकार में सहयोगी पार्टी कांग्रेस को परोक्ष रूप से जूतों से पीटे जाने के उद्धव ठाकरे के बयान पर अभी बवाल जारी ही था कि मुख्यमंत्री ने राकांपा सुप्रीमो शरद पवार के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे कैंसर रोगियों के लिए आवास के निर्णय पर रोक लगा दी है। इससे लग रहा है कि तीन दलों की एमवीए सरकार में मतभेद चरम पर पहुंच गया है।
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मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में देश भर से कैंसर के मरीज इलाज कराने आते हैं। राकांपा नेता व आवास निर्माण मंत्री जितेन्द्र आव्हाड ने कैंसर के मरीजों व उनके परिजनों को रहने के लिए महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) का 100 फ्लैट टाटा मेमोरियल हास्पिटल को स्थानांतरित किया था।
परेल के लालबाग में हाजी कासम चॉल पुनर्विकास योजना के तहत 300 वर्गफुट के फ्लैट 1 रुपए प्रतिवर्ष के नाममात्र दर पर 30 साल के लिए दिए गए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ठाकरे ने इस योजना पर रोक लगाते हुए इस बारे में रिपोर्ट भी तलब की है।
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शिवसेना विधायक ने जताई थी आपत्ति
शिवसेना विधायक अजय चौधरी ने कैंसर रोगियों के लिए फ्लैट देने पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि टाटा हास्पिटल को जो फ्लैट दिए गए हैं उसमें कैंसर मरीजों को रखे जाने पर स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है।
इसलिए फ्लैट के बजाये भोईवाड़ा इलाके में पूरी इमारत दी जाए। चौधरी ने कहा कि चार साल पहले उनकी पत्नी की कैंसर से मौत हुई थी। उन्होंने पत्नी के नाम एक न्यास बनाया है जिसके जरिए मरीजों की मदद की जाती है।
सत्ता संघर्ष में इंसानियत की बलि ले ली गई: भाजपा
मुख्यमंत्री ठाकरे के फैसले पर भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने कहा कि सत्ता संघर्ष में इंसानियत की बलि ले ली गई। टाटा हास्पिटल को गरीब कैंसर पीड़ितों के लिए दिए गए घर पर रोक लगाकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह जताने की कोशिश की है कि उनकी नजर में शरद पवार की क्या अहमियत है। ठाकरे ने निर्णय पर रोक लगाकर यह बताया है कि राज्य में असली बॉस वही हैं।