चीन में जीरो कोविड पॉलिसी हटने के बाद कोरोना महामारी के प्रकोप ने फिर हाहाकार मचा रखा है। अस्पतालों में भारी संख्या में मरीज भर गए हैं। इसके साथ ही भारत भी अलर्ट हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसको लेकर समीक्षात्मक बैठक कर चुका है। देश में कोरोना की मौजूदा स्थिति को लेकर जानी-मानी वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग का कहना है कि पड़ोसी देश में भले ही कोरोना के मामले बढ़ रहे हों लेकिन फिलहाल भारत में स्थिति ठीक है।
डॉ. कांग ने कहा, हमारे पास कुछ मामले आए हैं। इनमें से कुछ मामले वेरिएंट XXB और वेरिएंट BF.7 हैं। हालांकि, इससे देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कोई उछाल नहीं आया है। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल साइंसेज की प्रोफेसर ने कहा कि इससे भी ज्यादा संक्रामक वेरिएंट नहीं आता है तो मुझे संक्रमण के मामलों में उछाल की उम्मीद नहीं है।
देश में चीन वाले वेरिएंट या कोई ओर नया वेरिएंट आता है तो इसका पता लगाने को लेकर कांग ने कहा, फिलहाल भारत ठीक करहा है, लेकिन वायरस के व्यवहार में किसी भी बदलाव का पता लगाने के लिए निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। डॉ. कांग ने कहा, हमारे पास सीक्वेंसिंग को लेकर पर्याप्त सुविधाएं हैं। यदि रियल टाइम सीक्वेंसिंग होगी तो हम निश्चित रूप से नए वेरिएंट का पता लगाने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा, जब अस्पतालों में गंभीर मामले आने लगेंगे तो हमें इसकी जानकारी मिल जाएगी। इससे हमें फायदा होगा।
उन्होंने कहा, बीते कुछ हफ्तों से जो ट्रेंड दिख रहा है, उससे भविष्य का संकेत मिलता है। इससे स्पष्ट है कि भारत की स्थिति क्या है। हमारे यहां अभी मामले बढ़ने के संकेत नहीं है और हम सतर्क हैं। कोरोना माहामारी और टीकाकरण को लेकर आ रही ताजा रिपोर्टों को लेकर उन्होंने कहा, हमारी आबादी को प्रारंभिक स्तर पर वैक्सीन लगाई गई थी। यहां संक्रमण की उच्च दर (अनुमानित नब्बे फीसदी) है। देश में अधिकांश संक्रमण ओमिक्रॉन के दौरान था। इस तरह से हमारे यहां लोगों को हाइब्रिड इम्युनिटी मिल चुकी है।
वायरोलॉजिस्ट ने कहा, चीन की मौजूदा स्थिति बिल्कुल वैसी है, जैसी भारत में दूसरी लहर (अप्रैल-मई 2021 और जनवरी 2022) के दौरान थी। चीनी वैक्सीन को लेकर उन्होंने कहा, वे टीके जो गंभीर बीमारी और मृत्यु को रोकने के लिए अच्छी तरह से काम करते हैं, लेकिन वे एमआरएनए टीकों की तुलना में कम प्रभावी हैं। जब बहुत सारे लोग संक्रमण का शिकार होते हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं, ऐसे में कर्मचारियों की कमी के कारण अस्पतालों पर बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में रोगियों की ठीक से देखभाल नहीं हो पाती है।