रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत अब सैन्य मंचों के लिए असेंबली वर्कशॉप बनकर नहीं रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य अब अत्याधुनिक रक्षा हार्डवेयर का उत्पादन (प्रोडक्शन) करना है। सिंह भारतीय और वैश्विक एयरो स्पेस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
सिंह ने उद्योग जगत के दिग्गजों से आह्वान किया कि वह रक्षा उत्पादन (डिफेंस प्रोडक्शन) में आत्मनिर्भरता को हासिल करने की देश की नीति के अनुरूप महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों (टेक्नोलॉजी) का इस्तेमाल करें और प्रमुख सैन्य मंचों और उपकरणों का अग्रणी निर्माता बनने की भारत की आकांक्षाओं का समर्थन करें। येलहांका वायुसेना स्टेशन कॉम्पलैक्सक में एयरो इंडिया शो के 14वें संस्करण के अवसर पर गोलमेज बैठक में सत्तर शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों को भारत में कारोबार करने के लिए सभी जरूरी समर्थन देने का आश्वासन दिया और कहा कि सरकार व उद्योगों की साझेदारी समानता और परस्पर विश्वास पर आधारित है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वदेशीकरण आज के भारत का मंत्र है। उन्होंने बीच में आने वाली परेशानियों को दूर करने और व्यवसायों को सुविधाजनक बनाने की दिशा में सरकार की ओर से समर्थन भी व्यक्त किया।
पांच दिवसीय एशिया के सबसे बड़े एयरोस्पेस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने पिछले आठ-नौ साल में अपने रक्षा उत्पादन का कायाकल्प किया है और अब यह अनुकूल आर्थिक नीतियों के दम पर दुनिया के सबसे बड़े रक्षा विनिर्माण देशों में शामिल होने के लिए तेजी से आगे बढ़ेगा।
वहीं, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अब सिर्फ असेंबली वर्कशॉप बनकर नहीं रहना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के अनुरूप भारत रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में मित्र देशों के साथ जुड़ने पर विचार कर रहा है। सिंह ने उद्योग जगत के नेताओं से यह भी कहा कि सरकार नए विचारों के लिए तैयार हैं और रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र के भागीदारों की उर्जा, उद्यमशीलता की भावना और क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने एक जीवंत और विश्व स्तरीय रक्षा विनिर्माण उद्योग को भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक बताया। उन्होंने देश में व्यापार के अनुकूल माहौल बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा किए गए कई दूरगामी सुधारों का भी जिक्र किया। इनमें उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा गलियारों (डिफेंस कॉरिडोर) की स्थापना, औद्योगिक-लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं का सरलीकरण, रक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा में वृद्धि, निजी क्षेत्र के लिए सरकारी परीक्षण सुविधाएं खोलना और केंद्रीय बजट 2023-24 में रक्षा के लिए पूंजीगत परिव्यय में वृद्धि शामिल है।
सिंह ने अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) को बढ़ावा देने के लिए 'प्रौद्योगिकी विकास कोष' और 'रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार' की शुरुआत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से भारतीय रक्षा उत्पाद वैश्विक रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे। रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की सराहना की और भरोसा जताया कि यह राउंडटेबल मीटिंग नए उद्यमों और साझेदारी के बीज बोएगी, निवेश को बढ़ावा देगी, स्वदेशी विनिर्माण का विस्तार करेगी और भारत में एयरोस्पेस और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी।