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जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण से जुड़े मलयेशिया के प्रधानमंत्री के दावे का भारत ने किया खंडन

Tue, 17 Sep 2019 07:46 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जाकिर नाइक (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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भारत ने मलयेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के उस दावे का मंगलवार को खंडन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धनशोधन और आतंकवाद संबंधी आरोपों को लेकर भारत में वांछित जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का उनसे अनुरोध नहीं किया है।

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भारत ने कहा कि पिछले महीने जब रूस में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी तो यह मुद्दा उठाया गया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि नाइक के प्रत्यर्पण का मुद्दा वास्तव में व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री मोदी की मलयेशियाई समकक्ष के साथ बैठक के दौरान उठा था।

जयशंकर ने कहा कि भारत पहले ही जनवरी में मलयेशिया से नाइक के प्रत्यर्पण का अनुरोध कर चुका है। 53 वर्षीय नाइक 2016 में भारत छोड़कर मुस्लिम बहुल मलयेशिया चला गया था जहां उसे स्थायी निवासी का दर्जा प्रदान कर दिया गया था।
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इससे पहले, महातिर ने कहा कि मोदी ने इस महीने के शुरू में रूस में एक आर्थिक मंच सम्मेलन के दौरान मुलाकात में उनसे विवादास्पद इस्लामी प्रचारक के प्रत्यर्पण का कोई अनुरोध नहीं किया था। हालांकि, नई दिल्ली ने एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है।

विदेश सचिव विजय गोखले ने पांच सितंबर को पत्रकारों को प्रधानमंत्री की महातिर के साथ द्विपक्षीय बैठक के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा था कि मोदी ने नाइक के प्रत्यर्पण का मुद्दा मलयेशियाई प्रधानमंत्री के साथ उठाया।

नाइक के प्रत्यर्पण के बारे में पूछे जाने पर महातिर ने मलेशियाई रेडियो स्टेशन बीएफएम 89.9 से कहा, ‘बहुत अधिक देश उसे पसंद नहीं करते। मैंने मोदी से मुलाकात की। उन्होंने इस व्यक्ति के लिए नहीं कहा।’

उन्होंने यह भी कहा कि मलयेशिया को एक स्थान की तलाश है जहां जाकिर नाइक को भेजा जा सके जिसने हाल में हिंदू और चीनी मलयेशियाई लोगों के खिलाफ नस्ली रूप से संवेदनशील टिप्पणी की थी।

प्रधानमंत्री महातिर ने उसके बाद दोहराया कि नाइक द्वारा नस्ली रूप से विभाजनकारी टिप्पणी के बाद अब उसे मलयेशिया में सार्वजनिक रूप से बोलने नहीं दिया जाएगा।

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