भारत ने म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के बाद ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत 625 मीट्रिक टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि 28 मार्च को शुरू किए गए इस ऑपरेशन के तहत भारत ने म्यांमार में बचाव कार्य, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री भेजने के लिए कई विमान और भारतीय नौसेना के जहाजों का इस्तेमाल किया।
बता दें कि
विनाशकारी भूकंप के बाद ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारत ने अभी तक कुल तीन खेप म्यांमार भेजे है। पहली खेप में 15 टन आपूर्ति, जिसमें टेंट, कंबल, दवाएं और भोजन शामिल थे, 29 मार्च को यांगून में पहुंचाई गई। इसके बाद दूसरी खेप में 80 एनडीआरएफ खोज और बचाव विशेषज्ञों के साथ 22 टन राहत सामग्री, जिसमें स्वच्छता किट, रसोई सेट, और दवाएं शामिल थीं, 30 मार्च को नेपीता में पहुंची।
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वहीं तीसरी खेप में 60 टन से अधिक आपूर्ति भेजी गई, जिसमें सर्जिकल शेल्टर, जल स्वच्छता सेवाएं, और महिला और बाल देखभाल सेवाएं शामिल थीं। इसके साथ ही 118 सदस्यीय भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल मांडले में स्थापित किया गया है, जहां सर्जरी और इलाज किया जा रहा है।
भारतीय सेना ने दी जानकारी
वहीं इस मामले में
भारतीय सेना ने बताया कि मांडले में स्थित भारतीय सेना के अस्पताल में सर्जनों ने दो जीवन रक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। म्यांमार के राहत कार्यों के प्रभारी लेफ्टिनेंट जनरल म्यो मो आंग ने अस्पताल का दौरा किया और भारत के सहायता प्रयासों की सराहना की।
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
साथ ही विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय नौसेना के दो जहाज, सतपुड़ा और सावित्री, 29 मार्च को 40 टन राहत सामग्री लेकर यांगून रवाना हुए थे, जिन्हें सोमवार को यांगून के मुख्यमंत्री को सौंपा गया। इसके बाद, अंडमान और निकोबार से दो और भारतीय नौसेना के जहाज, करमुक और एलसीयू 52, 30 मार्च को यांगून के लिए रवाना हुए, जिनमें 30 टन राहत सामग्री थी।
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म्यांमार में भूकंप ने मचाया त्राहिमाम
म्यांमार में पिछले सप्ताह आए विनाशकारी भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां भूकंप के चलते ढही इमारतों से शव निकलने का सिलसिला जारी है। इसके चलते अब तक यहां 2700 लोगों की मौत हो चुकी है। म्यांमार में 28 मार्च को 7.7 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे थे। इसके बाद 6.4 तीव्रता के भी झटके महसूस हुए। भूकंप का केंद्र मेंडले और सेगेंग शहरों की सीमा पर जमीन के 10 किलोमीटर भीतर था। भूकंप के चलते बुनियादी ढांचे, सड़कें और रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान हुआ। भूकंप के झटके न सिर्फ म्यांमार बल्कि पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए। थाईलैंड का चियांग मेई शहर में भी इस भूकंप के चलते काफी नुकसान हुआ।