चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस तीनों सेनाओं में सबसे वरिष्ठ होगा। वह रक्षा योजनाओं और प्रबंधन पर सरकार को सलाह देगा। सीडीएस की नियुक्ति के बाद डिफेंस प्लान में तीनों सेनाओं के बीच प्राथमिकता तय करना आसान होगा। जैसे- बजट में किस पर ज्यादा खर्च करना है, किसे उपकरण खरीद करना है इत्यादि। इससे तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर होगा। तीनों सेनाओं की उपयोगिता कहां और कैसे करनी है इस पर भी प्रभावी फैसला लिया जा सकेगा। इसके अलावा सीडीएस एनएसए और खुफिया प्रमुखों के साथ तालमेल को भी बेहतर ढंग से क्रियान्वित कर सकेगा।
सीडीएस की नियुक्ति से युद्ध के समय सिंगल प्वॉइंट आदेश जारी किया जा सकेगा, जिसका मतलब तीनों सेनओं को एक ही जगह से आदेश जारी होगा। जिससे सेना की रणनीति पहले से अधिक प्रभावशाली हो जाएगी, और कोई कन्फयूजन की कोई स्थिति नहीं होगी। इससे काफी हद तक हम अपना नुकसान होने से बचा पाएंगे।
सीडीएस की वैधानिक स्थिति और प्रोटोकॉल
भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न सीडीएस की वैधानिक स्थिति और प्रोटोकॉल को लेकर था। मौजूद तीनों जनरल चार स्टार और रक्षा सचिव के समकक्ष हैं। ऐसे में सीडीएस को क्या रैंक और प्रोटोकॉल दिया जाए इसको लेकर कई मतभेद हैं।
अभी अमेरिका,चीन, यूनाइटेड किंगडम जापान के साथ-साथ कई और देशों के पास चीफ ऑफ डिफेंस का पद है। राष्ट्र सुरक्षा के सभी मामलों से सीमित संसाधनों से साथ निपटने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस के पद की बहुत जरूरत थी। चीफ स्टाफ कमेटी में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुख शामिल होते है। कमेटी के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसका चेयरमैन नियुक्त किया जाता है।
एनएसए एक आईपीएस या आईएफएस अधिकारी होता है जबकि सीडीएस एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होगा। देखा जाए तो एनएसए और सीडीएस की भूमिका और जिम्मेदारियां लगभग एक समान है। ऐसे में देखने वाली बात ये सरकार किसकी वरिष्ठता तय करेगी या दोनों पदों को समान रखा जाएगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और भारत
साल 1998 में एक टास्क फोर्स की सिफारिश पर वाजपेयी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर तीन स्तरीय ढांचा तैयार किया था। जिसके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति प्रधानमंत्री को देश के आंतरिक और बाहरी खतरों से संबंधित सभी मामलों में सलाह देने के लिए की जाती है। इसके अलावा पडोसी देशों के साथ सीमा मुद्दों, विदेश की खुफिया एजेंसियों के बीच गुप्त और खुले ऑपरेशन, देश के ऊपर आने वाले किसी भी संभावित खतरे से निपटने की रणनीति बनाने का दायित्व भी एनएसए का ही होता है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद सृजित किया और ब्रजेश मिश्रा भारत के पहले सुरक्षा सलाहकार हुए।
अगर भारत को किसी देश पर न्यूक्लियर हमला करना हो तो इस स्थिति में प्रधानमंत्री के अलावा एक और सीक्रेट कोड होता है जो कि देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पास होता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में एनएसए को विदेश नीति को ठीक करने के लिए भी प्रधानमंत्री की तरफ से प्रतिनिधि बनाकर विदेश भेजा जा सकता है।
वर्ष 2012 में नरेश चंद्रा कमेटी ने चीफ आफ डिफेंस के पद की भूमिका और जिम्मेदारियों का मसौदा तैयार किया था। जिसमें कहा गया था कि सीडीएस प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार होंगे। इसके साथ ही वे किसी भी संयुक्त सेना कार्यवाही की जानकारी प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और सुरक्षा समिति को देंगे।
सीडीएस कार्रवाई के लिए सेना को नहीं दे सकता आदेश
सीडीएस किसी भी कार्रवाई के लिए सेना को आदेश नहीं दे सकता, वह इसके लिए प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री को केवल सलाह दे सकता है। सीडीएस प्रधानमंत्री और सुरक्षा समिति को न्यूक्लियर टारगेट की तकनीकी और रणनीतिक जानकारियों को लेकर भी राय दे सकते है। सीडीएस को सुरक्षा समिति का स्थायी सदस्य होना अनिवार्य है।
अमेरिका
यूएस में ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) का चेयरमैन का पद हमारे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बराबर का पद है। यह अमेरिकी सरकार को सेना से समस्त गतिविधियों की जानकारी देने के साथ सेना और सरकार के बीच तालमेल का काम करता है। वर्तमान में जनरल जोसेफ डनफोर्ड ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) के चेयरमैन हैं।
ब्रिटेन
ब्रिटेन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं का प्रमुख होता है जो रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री का प्रमुख सुरक्षा सलाहकार भी होता है। वर्तमान में इस पद पर जनरल सर निक कार्टर चीफ हैं।
चीन
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की देखरेख ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट ऑफ द सेंट्रल मिलिट्री कमीशन करता है। इस डिपार्टमेंट को कमांड सेंट्रल मिलिट्री कमीशन द्वारा मिलता है। जिसके वर्तमान में प्रमुख जनरल ली जोउचेंग हैं।