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भारत में 10 साल में दोगुनी से ज्यादा बढ़ी शराब की खपत

Sun, 23 Sep 2018 05:21 AM IST
नई दिल्ली/जेनेवा
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भारत में पिछले 10 साल में शराब की खपत दोगुनी से ज्यादा बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 2.4 लीटर थी, जो 2016 में बढ़कर 5.7 लीटर हो गई। 2025 तक इसमें और इजाफा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शराब पीने से 2016 में दुनिया में 30 लाख लोगों की मौत हुई, जो एड्स, हिंसा और सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़े से भी ज्यादा है। 
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वर्तमान में करीब 23.7 करोड़ पुरुष और 4.6 करोड़ महिलाएं शराब से जुड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर यूरोप और अमेरिका में रहने वाले हैं। यूरोप में प्रति व्यक्ति शराब की खपत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा 10 लीटर है, जबकि वहां 2010 के मुकाबले अब शराब की खपत में 10 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शराब पीने की वजह से लीवर सिरोसिस और कुछ कैंसर समेत 200 से ज्यादा स्वास्थ्य विकार होते हैं।


भारत में प्रति व्यक्ति खराब की खपत
वर्ष     खपत
2005    2.4 लीटर
2016    5.7 लीटर
2025    7.9 लीटर

-4.2 लीटर शराब पीते हैं भारतीय पुरुष, जबकि महिलाएं 1.5 लीटर शराब पीती हैं
-10 लीटर प्रति व्यक्ति शराब की खपत है यूरोप में, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है

दुनिया में 2.3 अरब है शराब पीने वालों की संख्या

-26.5 फीसदी 15-19 साल की उम्र के युवक पीते हैं शराब
-15.5 करोड़ किशोर हैं शराब के आदी

2016 में दुनिया ने भुगता शराब पीने का खामियाजा...

-30 लाख लोगों की मौत हुई, जो कुल मौतों की 5.3 फीसदी है
-23 लाख पुरुषों और 7 लाख महिलाओं की मौत हुई सिर्फ शराब पीने से
-13.26 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्घटना के कारण अपंग हुए
-10.65 करोड़ पुरुषों और 2.61 करोड़ महिलाएं अपंग हुईं शराब पीने के कारण

2010 के बाद नहीं बढ़ी शराब की खपत

दुनिया में 2000 से 2005 के बीच शराब की खपत में बढ़ोतरी नहीं हुई। 2005 में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 5.5 लीटर थी, जो 2010 में बढ़कर 6.4 लीटर हो गई। इसके बाद से दुनिया में शराब की खपत नहीं बढ़ी है। अब भी यह 6.4 लीटर ही है।
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शराब पीने के नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिवर्ष शराब के सेवन से होने वाली कुल मौतों में 28 फीसदी शराब के उपयोग से संबंधित घटनाओं, जैसे नशे में वाहन चलाना एवं घर में मारपीट, स्वयं को नुकसान पहुंचाने आदि से होती हैं। 21 फीसदी पाचन शक्ति में खराबी आने के कारण, 19 फीसदी दिल संबंधी बीमारियों की वजह से और शेष मौतें कैंसर, खतरनाक संक्रमण, मानसिक बीमारियों एवं अन्य स्वास्थ्य कारणों से होती हैं।

बुराई पर कार्रवाई के लिए सही समय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एधानॉम गेब्रेयेसस का कहना है कि शराब की वजह से होने वाली मौतों में से तीन चौथाई से ज्यादा के शिकार पुरुष होते हैं। बहुत से लोगों के लिए शराब के हानिकारक परिणामों का प्रभाव उनके परिजन और समाज के लोगों पर हिंसा, चोट, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, कैंसर और हृदयाघात जैसी बीमारियों के तौर पर पड़ता है। स्वस्थ समाज विकसित करने की दिशा में इस गंभीर खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई तेज करने की जरूरत है। यह सही समय है, जब इस बुराई पर तेजी से कार्रवाई हो, अन्यथा देर हो जाएगी।
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