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Buddha Purnima: इसी तिथि को परमाणु महाशक्ति के तौर पर हुआ था भारत का उदय, कैसे बुद्ध पूर्णिमा पर हुआ परीक्षण?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 12 May 2025 01:48 PM IST

सार

भारत के परमाणु महाशक्ति बनने की कहानी क्या रही? भारत की तरफ से अपने पहले परमाणु परीक्षण का बुद्ध पूर्णिमा की तिथि से क्या कनेक्शन है? भारत के लिए इस न्यूक्लियर टेस्ट के क्या मायने थे और इससे दुनिया को क्या संदेश गया? इस परमाणु परीक्षण का दूरगामी असर क्या हुआ? आइये जानते हैं...
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ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध की कहानी। - फोटो : अमर उजाला
भारत आज बुद्ध पूर्णिमा मना रहा है। देशभर में यह मौका भगवान बुद्ध की जयंती के तौर पर जाना जाता है। हालांकि, अगर इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो सामने आता है कि 51 वर्ष पहले इसी तिथि को भारत दुनिया का परमाणु शक्ति से संपन्न छठा देश बना था। गर्व की बात यह है कि भारत के परमाणु महाशक्ति बनने से पहले दुनिया में सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्य देश- अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन ही परमाणु शक्ति वाले देश थे। यानी भारत पहला ऐसा देश रहा, जो इस धड़े का हिस्सा न होने के बावजूद परमाणु महाशक्ति बना।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि भारत के परमाणु महाशक्ति बनने की कहानी क्या रही? भारत की तरफ से अपने पहले परमाणु परीक्षण का बुद्ध पूर्णिमा की तिथि से क्या कनेक्शन है? भारत के लिए इस न्यूक्लियर टेस्ट के क्या मायने थे और इससे दुनिया को क्या संदेश गया? इस परमाणु परीक्षण का दूरगामी असर क्या हुआ? आइये जानते हैं...
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ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध की कहानी। - फोटो : अमर उजाला
भारत आज बुद्ध पूर्णिमा मना रहा है। देशभर में यह मौका भगवान बुद्ध की जयंती के तौर पर जाना जाता है। हालांकि, अगर इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो सामने आता है कि 51 वर्ष पहले इसी तिथि को भारत दुनिया का परमाणु शक्ति से संपन्न छठा देश बना था। गर्व की बात यह है कि भारत के परमाणु महाशक्ति बनने से पहले दुनिया में सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्य देश- अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन ही परमाणु शक्ति वाले देश थे। यानी भारत पहला ऐसा देश रहा, जो इस धड़े का हिस्सा न होने के बावजूद परमाणु महाशक्ति बना।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि भारत के परमाणु महाशक्ति बनने की कहानी क्या रही? भारत की तरफ से अपने पहले परमाणु परीक्षण का बुद्ध पूर्णिमा की तिथि से क्या कनेक्शन है? भारत के लिए इस न्यूक्लियर टेस्ट के क्या मायने थे और इससे दुनिया को क्या संदेश गया? इस परमाणु परीक्षण का दूरगामी असर क्या हुआ? आइये जानते हैं...

क्या है भारत के परमाणु महाशक्ति बनने की कहानी?
51 वर्ष पहले बुद्ध पूर्णिमा के दिन (18 मई 1974) की तिथि भारत के पहले परमाणु परीक्षण के लिए चुनी गई थी। हालांकि, इस कहानी को जानने से पहले यह जाना भी जरूरी है कि भारत को परमाणु महाशक्ति बनने की जरूरत क्यों महसूस हुई। 

आखिरकार 1974 में बुद्ध पूर्णिमा के दिन इस परमाणु परीक्षण को राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र पोखरण में किया गया। इसे रेगिस्तान में 107 मीटर गहरी भूमिगत शाफ्ट में अंजाम दिया गया था। इस न्यूक्लियर टेस्ट को पोखरण-1 के नाम से भी जाना गया। हालांकि, चूंकि इसकी तिथि बुद्ध पूर्णिमा के दिन की थी, इसलिए इसे ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा कोड नेम दिया गया। अमेरिका के मुताबिक, पहले इस ऑपरेशन का नाम- हैप्पी कृष्ण रखा गया था। 

पहले परमाणु परीक्षण का बुद्ध पूर्णिमा से कनेक्शन?
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत के पहले परमाणु परीक्षण का नाम ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध, इस दिन पड़ने वाली तिथि की वजह से ही रखा गया। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिलती कि भारत ने इस खास तिथि पर ही परमाणु परीक्षण क्यों किया। राजनीतिक टिप्पणीकार इंदर मल्होत्रा के मुताबिक, पहले परमाणु परीक्षण को लेकर आखिर तक संशय की स्थिति रही थी। तब राजा रमन्ना (एटॉमिक एनर्जी कमीशन के तत्कालीन प्रमुख), तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सलाहकार पीएन हकसर और पीएन धर इस परीक्षण के खिलाफ थे और इसे टालना चाहते थे। एटॉमिक एनर्जी कमीशन के चेयरमैन होमी सेठना ने इस पर राय नहीं दी और रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार डी. नाग चौधरी इंदिरा गांधी को परमाणु परीक्षण के फायदे और नुकसान दोनों ही गिना रहे थे। 

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हालांकि, इंदिरा गांधी ने उन्हें मध्य में ही रोक दिया और डॉ. रमन्ना को परमाणु परीक्षण के साथ बढ़ने का निर्देश दिया। इसके बाद भारत ने 18 मई 1974 को पोखरन में 12-13 किलोटन के परमाणु उपकरण का परीक्षण किया। इस पूरे कार्यक्रम में 75 रिसर्चर और वैज्ञानिक शामिल रहे। अगली सुबह डॉ. रमन्ना ने उन्हें खुशखबरी सुनाते हुए कहा, "बुद्ध मुस्कुराए हैं।" 

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस परमाणु परीक्षण के बाद इसे शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट करार दिया था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही परमाणु परीक्षण कर भारत ने यह साफ संदेश दे दिया था कि वह यह टेस्ट किसी को हमला करने के लिए नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण अस्तित्व और संतुलन बनाने के लिए कर रहा है। भारत ने यह प्रदर्शन किया कि कठिन परिस्थितियों और चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के बीच भी वह खुद की रक्षा का दम रखता है। भारत ने ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्ध के बाद परमाणु उपकरणों को हथियार नहीं बनाया। इसके लिए भारत की तरफ से 1998 में पोखरण-2 टेस्ट किया गया, जिसने आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा बुनियाद को और मजबूत किया। 

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