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रोहिंग्या मामले और गौरी लंकेश की हत्या पर UN ने की आलोचना, भारत बोला- 'सबका साथ, सबका विकास'

Tue, 12 Sep 2017 10:27 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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रोहिंग्या मामले पर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना के जवाब में भारत ने 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा दिया है। आपको बता दें कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और रोहिंग्या मामले पर यूएन ने भारत की आलोचना की थी।संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत ने कहा है कि बीते दिनों में जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की सुरक्षा का मसला तेजी से बढ़ा है।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि ने इशारों में पाकिस्तान को निशाने पर लेते हुए कहा कि अफसोस की बात है कि आतंक के केंद्र की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर भारत ने कहा कि वह अवैध प्रवा‌सियों से चिंतित है।

भारत ने रोहिंग्या मुसलमानों के अवैध तौर से रहने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। यूएन में भारत के प्रतिनि‌धि ने कहा कि अवैध प्रवासियों के कारण सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत ने कहा कि मानवाधिकारों का आंकलन राजनीतिक सुविधाओं के लिए नहीं होना चाहिए।
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पार्लियामेंट मिशन ऑफ इंडिया के पहले सचिव सुमित सेठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान द्वारा लोकतांत्रिक विकल्प का खंडन करने के प्रयासों को अस्वीकार करते हैं जिसे जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा नियमित रूप से प्रयोग किया जाता है। 

पाक एक ऐसा देश है जिसने अपने स्वयं के नागरिकों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया, जिसमें बलूचिस्तान के लोग भी शामिल हैं। सेठ ने कहा कि भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर में वर्तमान में जो स्थिति है वह पाकिस्तान के आतंकवाद का परिणाम है। 
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रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर भारत का रुख नियमों के खिलाफ, UN ने कहा- नहीं भेज सकते वापस

बता दें कि  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख जैद राद अल हुसैन ने रोहिंग्या मुसलमानों को भारत से वापस भेजने की केन्द्र सरकार की कोशिशों की निंदा की है।अल हुसैन ने कहा कि भारत के गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कथित रूप से बयान दिया है कि चूंकि भारत रिफ्यूजी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने वाला देश नहीं है इसलिए भारत इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय कानून से हटकर काम कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के मुताबिक भारत का ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और प्रावधानों के विधिसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रचलित कानून के आधार पर भारत रोहिंग्या मुसलमानों का उन देशों या उन इलाकों में सामूहिक निष्कासन नहीं कर सकता है, जहां उन पर अत्याचार होने की आशंका है या फिर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त भारत में 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं इनमें से 16 हजार लोगों ने शरणार्थी दस्तावेज भी हासिल कर लिए हैं।
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