सूत्रों के मुताबिक भारत ने दो टूक संदेश दे दिया है कि मित्रता का स्तर छोड़ चीन का दादागिरी वाला रवैया भारत को किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। इसके लिए भारत किसी भी हद तक जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि कोर कमांडर स्तर की बातचीत में चीन भले आगे बातचीत जारी रखने की बात कर मामले को खींच रहा हो, मगर उसके तेवर खासे नरम थे।
उधर, औपचारिक कूटनीतिक मंच पर होने वाली बातचीत में भी चीन के सम्मानजनक बाहरी रास्ते से निकल जाने की उम्मीद जताई जा रही है। भारत के कूटनीतिकार भी चीन को यह रास्ता देने की तैयारी में जुटे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक बैकचैनल के जरिए ही पाकिस्तान को भी संदेश दे दिया गया है कि वह भारत चीन की तनातनी में कूदेगा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, जिसमें चीन ज्यादा मददगार साबित नहीं होगा। मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से लगी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सैन्य जमावड़ा हमले के लिए नहीं, बल्कि अपने बचाव के लिए कर रहा है।
उसे गंभीर डर है कि दोनों मोर्चे पर लड़ने में पूरी तरह सक्षम भारतीय सेना कहीं पीओके में मोर्चा ना खोल दे। सेना के उच्च अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान को मालूम है कि कोल्ड स्टार्ट सिद्धांत के तहत पाकिस्तानी मोर्चे पर कार्रवाई के लिए भारत को किसी बड़े तैयारी की जरूरत नहीं।
सेना के उत्तरी कमान के कमांडर और 2016 में पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के अगुवा रहे लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि चीन के कब्जे वाले इलाके के इर्द-गिर्द सिर्फ सैन्य जमावड़े से समाधान नहीं निकलने वाला। हुड्डा के मुताबिक कभी-कभी यह अच्छी रणनीति होती है कि सेना आगे बढ़ कर पीछे हटने के सारे रास्ते नष्ट कर दे।
इससे आपके किसी भी हद तक जाने की ठोस मंशा साफ हो जाती है और दुश्मन की मनोदशा पर जबरदस्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुश्मन के दिमाग में अपनी मंशा साफ तौर पर प्रदर्शित करना सटीक रणनीति है। सरकार ने चीन को चौतरफा घेर कर काफी हद तक अपनी मंशा साफ कर दी है।
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