रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने लद्दाख में भारत-चीन सीमा विवाद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के प्रस्ताव की आलोचना की है। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत और चीन के पास सीमा विवाद सुलझाने के लिए मजबूत तंत्र है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रही है।
अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर ने कहा, ट्रंप का प्रस्ताव अनुचित है। शायद वह प्रस्ताव के जरिए एक महान वार्ताकार के रूप में खुद की छवि बनाना चाहते हैं। वह अक्सर ऐसे मुद्दों में शामिल होने के प्रयास करते रहे हैं। वहीं रूस में भारत के पूर्व राजदूत पीएस राघवन ने भी मीरा शंकर की बातों पर जोर देते हुए कहा कि तीसरे पक्ष की मध्यस्थता वास्तव में जटिल द्विपक्षीय मुद्दों को हल नहीं कर सकती।
हमने अपने किसी भी द्विपक्षीय मुद्दे के समाधान में तीसरे पक्ष से हस्तक्षेप करने को नहीं कहा है। हमने अपने दोनों पड़ोसी देशों (पाकिस्तान और चीन) के साथ मजबूती से मुद्दे सुलझाए हैं। हमारे पास तंत्र और संवाद मौजूद है। हम इन तंत्रों के तहत द्विपक्षीय मुद्दों से निपट रहे हैं।