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भारत एलएसी को तार्किक मानता है, लेकिन चीन नहींः राजनाथ सिंह

Wed, 16 Sep 2020 01:28 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • संसद में रक्षामंत्री ने दिया बयान, चीन के धोखे के बारे में सदन को बताया
  • कहा, गलवां में जवानों ने जरूरत के मुताबिक संयम के साथ शौर्य भी दिखाया
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Rajnath Singh - फोटो : Loksabha TV
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विस्तार
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लोकसभा में मंगलवार को राजनाथ सिंह ने चीन पर बीते सात दशक में हुए समझौते हुए सहमतियों का सम्मान न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,भारत एलएसी को तार्किक और परिपूर्ण मानता है, मगर चीन इसे नहीं मानता। बीते सदी के पचास और साठ के दशक में विवाद सुलझाने पर कई दौर की बातचीत हुई। फिर 1993 से 2003 तक हुई कोशिशें बेनतीजा रहीं। हालांकि इस दौरान दोनों पक्षों ने एलएसी पर कम संख्या में सेना की तैनाती, शांति बहाली पर सहमति दी। मगर चीन ने कभी इन सहमतियों का सम्मान नहीं किया। 

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राजनाथ सिंह ने चीन के एक-एक धोखे के बारे में सदन को बताया। उन्होंने कहा कि अप्रैल से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन से सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई और मई में गलवां घाटी में चीन ने भारतीय जवानों की परंपरागत और सामान्य गश्त में बाधा पैदा की, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई।

यहां पर भारतीय सेना ने चीन को पूरा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 15 जून को गलवां में हमारे बहादुर जवानों ने जहां संयम की जरूरत थी, वहां संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी, वहां शौर्य दिखाया। पीएम के बहादुर जवानों के बीच जाने के बाद हमारे कमांडर तथा जवानों में यह संदेश गया है कि देश के 130 करोड़ देशवासी जवानों के साथ हैं।
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सीमा पर चीन और पाकिस्तान की करतूतों का किया जिक्र
चीन लद्दाख में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किमी भूमि का अनधिकृत कब्जा किया है। 1963 में एक तथाकथित सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने पीओके की 5180 वर्ग किमी भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को दे दी। भारत तथा चीन, दोनों ने, औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए धैर्य की आवश्यकता है और इस मुद्दे का स्पष्ट, तार्किक और सहमतिपूर्ण समाधान शांतिपूर्ण बातचीत से निकाला जाए।

अभी तक भारत-चीन के सीमा इलाकों में एलएसी पर आमतौर पर सीमांकन नहीं है और एलएसी को लेकर दोनों की समझ भी अलग-अलग है। इसलिए शांति और सद्भाव कायम रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौते और प्रोटोकॉल हैं।
 
29-30 अगस्त की रात को भी उकसावे की हरकत, जवानों ने नाकाम किया
राजनाथ ने कहा, चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की रात को उकसावे की सैन्य कार्रवाई की गई, जो पैंगोंग झील के दक्षिणी क्षेत्र में यथास्थिति को बदलने का प्रयास था। हालांकि, एक बार फिर हमारी सेना द्वारा समय पर दृढ़ कार्रवाई के कारण उनके ये प्रयास सफल नहीं हुए। साफ है कि चीन की यह हरकत हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के प्रति उसकी उपेक्षा है।
 
सदन को दिया भरोसा, सफलता से करेंगे हर चुनौती का सामना
राजनाथ ने कहा, सदन को आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारे सशस्त्र बल इस चुनौती का सफलता से सामना करेंगे और इसके लिए उन पर गर्व है। अभी जो स्थिति बनी हुई है उसमें संवेदनशील कार्रवाई के मुद्दे शामिल हैं, इसलिए मैं इस बारे में ज्यादा ब्यौरे का खुलासा नहीं करना चाहता हूं।

मैं अपने चीनी समकक्ष से 4 सितंबर को मास्को में मिला और उनसे हमारी गहन चर्चा हुई। मैंने स्पष्ट तरीके से हमारी चिंताओं को चीनी पक्ष के समक्ष रखा। मैंने यह भी स्पष्ट किया कि हम इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं और हम चाहते हैं कि चीनी पक्ष हमारे साथ मिलकर काम करें। हमने यह भी साफ कर दिया कि हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह से तरह से प्रतिबद्ध हैं।

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