लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच में हुए खूनी टकराव के बाद भारतीय रणनीतिकार तनाव का आंकलन करने में जुटे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीन के विदेश मंत्री यांग यी ने आरोप लगा दिए हैं।
चीन के साथ टकराव की स्थिति के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे।
समझा जा रहा है कि रक्षा मंत्री ने बैठक में ताजा हालात का जायजा लिया और भावी कदम पर विचार किया है। रक्षा मंत्री ने इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएसए के साथ भी बैठक की।
सेना मुख्यालय और विदेश मामलों के सूत्र कुछ इसी तरह की बात कर रहे हैं। बताते हैं कि दोनों देशों के बीच में तनाव को कम करने, पहले बनी सहमति का पालन कराने के संदर्भ में सेना के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी ने चीन के बिग्रेडियर स्तर के सैन्य अधिकारी से वार्ता की।
इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद दोनों देशों के मेजर जनरल स्तर के सैन्य अधिकारियों के बीच में वार्ता हुई। इस वार्ता का भी कोई सकारात्मक परिणाम आने का संकेत नहीं है।
ऐसे में एक बार फिर दोनों देशों के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के बीच वार्ता का विकल्प है। सैन्य कूटनीति के जानकारों का कहना है कि इस स्तर की वार्ता से पहले दोनों देशों के संयुक्त सचिव के बीच में आपसी सहमति बननी जरूरी है।
इसी आधार पर लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता का रोड-मैप तैयार होता है। माना जा रहा है कि इसके लिए विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) नवीन श्रीवास्तव और चीन के समकक्ष वू च्यागाओ के बीच में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से चर्चा हो सकती है।
वैसे भी दोनों देशों के बीच में हॉटलाइन मैकेनिज्म स्थापित है और दोनों देश सीमा सुरक्षा प्रबंधन के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय सैन्य बलों का गश्ती दल सैन्य कमांडरों के बीच में बनी सहमति के आधार पर पेट्रोलिंग कर रहा था। इस दौरान अचानक वहां चीन के सैनिक पहले से तैयारी करके कंटीली लाठी आदि लेकर आ गए।
भारतीय सैनिकों की गश्त का विरोध करने लगे। भारतीय सैनिकों ने बताया कि वह सैन्य कमांडरों के बीच में बनी सहमति के अनुसार गश्त कर रहे हैं।
बताते हैं इस बीच अचानक चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थर, कंटीली लाठियों आदि से हमला कर दिया। थोड़ी ही देर में हिंसक झड़प की स्थिति बन गई।
इससे पहले चीन के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पार करके मई के पहले सप्ताह में पैगांग त्सो झील, गलवां नाला (नदी) तक चले आए थे। फिंगर 4-8 तक भारतीय सेना पेट्रोलिंग करती थी और उन्हेंने इस क्षेत्र को भी अपना बताना शुरू किया। तनाव यहीं से शुरू हुआ।
जवाब में भारत ने चीन से अप्रैल 2020 की स्थिति में अपनी सेना को ले जाने का आग्रह किया। इसको लेकर दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच में 10 राऊंड की (मेजर जनरल स्तर तक की) बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
इसके बाद दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम तय हुआ। 5 जून को दोनों देशों के संयुक्त सचिवों की वार्ता के बाद छह जून को दोनों देशों के लेफ्टिनेंट जनरल के बीच में चर्चा हुई। इससे पहले चीन की सेनाएं कुछ किमी पीछे हटीं।
भारत ने भी अपनी फौज को विवादित क्षेत्र से वापस बुलाया। चीन ने भारतीय सैन्य बलों की तारीफ भी की। लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच मेजर जनरल स्तर के सैन्य अधिकारियों की वार्ता हुई। ऐसा लग रहा था कि सहमति बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल और दो सैनिकों के शहादत की सूचना है। सूत्र बताते हैं कि भारतीय सेना के कई सैनिक घायल हैं। कुछ गंभीर रूप से घायल हैं।
वहीं चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी चीनी सैनिकों के हिंसक झड़प का शिकार होने का दावा किया है। चीन का विदेश मंत्रालय और मीडिया इसके लिए भारतीय सैनिकों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है।
चीन के विदेश मंत्री का भी इस संदर्भ में बयान आया है और उन्होंने भारत से एकतरफा कार्रवाई न करने की अपील की है। लेकिन चीन के ग्लोबल टाइम्स ने हताहत होने वाले या गंभीर रूप से घायल सैनिकों की न तो संख्या बताई और न ही कोई दावा किया है।
कूटनीति, सैन्य नीति, विदेश नीति के रणनीतिकारों को चीन की मंशा पर संदेह होने लगा है। एक पूर्व अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी का कहना है कि चीन के राष्ट्रपति ने पहले ही अपने सैन्य कमांडरों को हर स्थिति से निबटने के लिए तैयार होने को कहा था।
अब ऐसे समय में उनके विदेश मंत्री आरोप लगा रहे हैं। चीन का यह कदम उसकी किसी नापाक मंशा की तरफ ईशारा कर रहा है। सूत्र का कहना है कि चीन भारत पर आरोप मढ़कर कोई नई चाल चल रहा है। जबकि यह दुनिया जानती है कि भारतीय सेना कभी भी अपनी मर्यादा का उल्लंघन नहीं करती।