1962 में हुई थी शुरुआत
भारत और चीन के बीच लगभग 3,500 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव की वजह भी सड़कों को ही माना जाता है। 1962 में जब चीन ने भारत की पूर्वी और उत्तरी सीमाओं पर हमला किया, उस दौरान एक वजह शिनजियांग और तिब्बत के बीच सड़क का निर्माण को भी माना जाता है। यह राजमार्ग आज जी219 के रूप में जाना जाता है और इस सड़क का लगभग 179 किमी हिस्सा अक्साई चिन से होकर गुजरता है, जो एक भारतीय क्षेत्र है।
गलवां इलाके में चीन ने बनाई सड़क
2016 तक, चीन ने गलवां घाटी के क्लैश पाइंट तक पक्की सड़क का निर्माण कर लिया है। इससे पहले मई के पहले हफ्ते में भी दोनों देशों के सैनिकों का इस इलाके में आमना-सामना हो चुका है। चीन ने अपने कब्जे वाले इलाके पेट्रोल पॉइंट 14 (PP14) तक सड़क बना ली है। इस क्षेत्र में मौजूदा चीनी आक्रमकता से निपटने के लिए भारतीय सेना की ओर से दरबूक श्योक दौलत बेग ओल्डी सड़क से निकलने वाली कनेक्टिंग सड़क बनाने की कोशिश है, जो और जो पीपी-14 तक आती है। एलएसी इस सेक्टर में श्योक नदी के बहुत करीब है। श्योक और गलवां नदी का संगम वास्तविक नियंत्रण रेखा से करीब आठ किलोमीटर है। वहीं चीन ने नदी घाटी में छोटी-छोटी चौकियां बनाई हैं जो चीनी सैनिकों के गश्त करने के लिए फॉरवर्ड पोजीशंस का काम करती हैं।
2023 तक 61 सड़कों का निर्माण
2017 में जब डोकलाम हुआ था, और दोनों देशों की सेनाएं 73 दिन तक भारत, भूटान और चीन के ट्राइंगल एरिया में आमने-सामने थीं, तब भी चीन के सड़क निर्माण को लेकर भारत ने विरोध जताया था। वहीं पिछले साल भारत ने भी इस इलाके में हमेशा मौसम के अनुकूल रहने वाली सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया और इस साल एलएसी के पास 11 और सड़कें पूरी करने का इरादा है।
वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की योजना 2023 तक 61 सड़कों के निर्माण की है। बीआरओ अब तक भारत-चीन बॉर्डर पर 3,346 किलोमीटर लंबी करीब सड़कों का निर्माण पूरा कर चुका है। इनमें 2,400 किलोमीटर तक की सड़कें हर मौसम के अनुकूल हैं। वहीं भारत ने 2019 तक लेह से काराकोरम पास के बीच 255 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया। 5000 मीटर ऊंचे इस पठार पर 37 से ज्यादा पुल बनाए गए हैं।
दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क
माना जा रहा है कि इस बार चीन के चिढ़ने की वजह यह सड़क ही है, क्योंकि यह सड़क दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी सड़क लेह से अक्साई चीन की सीमा से सटे दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी और सीमा पोस्ट से जोड़ती है। वहीं यह सड़क चीन, भारत और पाकिस्तान के ट्राई जंक्शन काराकोरम पास से 20 किमी दूर है। चीन को ड़र है कि इस सड़क के बन जाने के बाद दरबूक से दौलत बेग ओल्डी पोस्ट से लेकर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आखिरी गांव श्योक तक भारतीय सेना की आवाजाही बेहद आसान हो जाएगी। लद्दाख को चीन के झिनजियांग प्रांत से अलग करने वाले काराकोरम पास और श्योक के बीच दौलत बेग ओल्डी स्थित है, 16 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पहाड़ी मैदान भारतीय वायुसेना की सप्लाई के लिहाज से एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड की लोकेशन है।
जी219 को विस्तार देने की तैयारी
वहीं चीन भी 1962 में विवाद की ज़ड़ रही जी219 को विस्तार देने की कोशिशों में जुटा हुआ है। क्योंकि यह चीन की पश्चिमी सीमा के साथ-साथ 4500 मीटर ऊंचे तिब्बत से जोड़ती है। वहीं इसके रास्ते में कुनलुन, काराकोरम, गेनडीस और हिमालय पड़ता है। तिब्बत में यह सड़क शन्ना और निंगची तक पहुंचती है, जिसका एक हिस्सा अरुणाचल प्रदेश से जुड़ता है। चीन की योजना इस सड़क को दक्षिण चीन सागर के गुआंग्शी में वितनाम के पास डोंगशिग तक पहुंचाने की है। वहीं चीन की योजना इस सड़क में पड़ने वाले दो मेडॉग और जायू के बीच कंक्रीट रोड बनाने की है, लेकिन चीन की दिक्कत यह है कि ये दोनों इलाके भारतीय सीमा से छू रहे हैं और चीन हर हाल में ये सड़कें बनाना चाहता है।
अतः चीन की इन योजनाओं को देख कर नहीं लगता कि चीन कभी भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाना चाहेगा। चीन की कोशिश है कि वह जी219 शिनजियांग-तिब्बत राजमार्ग से भारत को दूर रखे। चीन ने भारत के जिन इलाकों पर कब्जा किया है वह ज्यादातर पहाड़ी दर्रे और क्रेस्टलाइन्स हैं, जहां पर्वत श्रृंखलाओं के बीच आवागमन के लिए पहाड़ी दर्रों की जरूरत होती है। चीन इन्हें नियंत्रित करके चाहता है कि भारतीय सेना पश्चिम से पूर्व की ओर कोई बड़ा मूवमेंट नहीं कर पाए और ऊंचे इलाके पर बैठा होने की वजह से भारत निचले इलाकों में भी कभी अपना दावा नहीं ठोक पाएगा, जिससे भविष्य में सड़क निर्माण का काम रुक जाएगा।