भारत और चीन के बीच चुशुल सेक्टर में मंगलवार को कॉर्प्स कमांडर स्तर की बैठक हुई। दोनों पक्षों के बीच 14.5 घंटे तक बैठक हुई। इस बैठक में विवाद वाले सभी चार प्वाइंट्स को लेकर भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच आगे की रणनीति बनी।
भारत सरकार के हाई-पावर चाइना स्टडी ग्रुप ने लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर हुई बैठक की दो घंटे तक समीक्षा की। इस ग्रुप की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और भारत-चीन सीमा वार्ता के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल, सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटनाक्रम से परिचित लोगों ने बताया कि गलवां सेक्टर (पेट्रोलिंग प्वाइंट 14) में तनाव कम करने के प्रयासों को समेकित किया गया है। इसके अलावा, पैंगोंग त्सो के पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (गोगरा) और फिंगर्स 4 और 5 पर अभी भी सैनिकों की उपस्थिति बरकरार है, लेकिन यहां सैनिकों की संख्या बहुत कम है।
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कॉर्प्स कमांडरों की बैठक में पीपी 15 और पैंगोंग त्सो में पूरी तरह से तनाव कम करने के लिए विशिष्ट समय सीमा पर भी चर्चा की गई। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, एहतियात के तौर पर फिंगर 4 की चोटी के दोनों ओर भारत और चीनी सेना के सैनिक तैनात हैं। वहीं, पीएलए फिंगर 6 की तरफ बढ़ रही है और उसकी फिंगर 5 में बहुत कम ही उपस्थिति रह गई है।
अधिकारियों ने कमांडरों की बैठक के परिणाम के आधार पर कहा कि ऐसा लगता है कि दोनों सेनाओं के बीच अब विवाद ठंडा पड़ रहा है। पीएलए इस बात की ओर इशारा कर रह रही है कि वह 20 अप्रैल वाली स्थिति बरकरार करने के लिए कार्य कर रही है। पीएलए अपनी तरफ से पैट्रोलिंग प्वाइंट 17 (हॉट स्प्रिंग्स) पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से अपने सभी टेंट, वाहनों और सामग्री को हटा लिया है।
गोगरा में भी पीएलए की मौजूदगी बहुत कम हो गई है, यहां 30 के करीब चीनी सैनिक फॉरवर्ड लोकेशन पर तैनात हैं। वहीं, यहां से सैनिकों को पीछे हटाने के लिए इस हफ्ते की समय सीमा तय की गई है। हालांकि, सरकार लद्दाख में 1,597 किमी एलएसी और अरुणाचल प्रदेश में 1,127 किमी एलएसी की निगरानी कर रही है और सेना अलर्ट पर है।