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सैन्य शक्ति में कम नहीं, फिर भी पत्थर-लाठियों से क्यों लड़े भारत और चीन के सैनिक 

Tue, 16 Jun 2020 07:07 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय-चीनी सेनाएं (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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पूर्वी लद्दाख के गलवां घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प में सोमवार रात को भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए। भारत-चीन सीमा पर करीब 45 साल बाद किसी सैनिक की जान गई है। साल 1975 में एलएसी पर चीन ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें चार सैनिक शहीद हुए थे। तब से दोनों देशों में झड़प तो कई बार हुई, लेकिन जान किसी की कभी नहीं गई। बीते एक महीने से लद्दाख में कई मौकों पर भारत और चीन की सीमाएं आमने-सामने हुईं। दोनों के बीच हिंसक झड़प हुईं और दोनों ओर से सैनिक घायल भी हुए। मगर इस दौरान एक भी गोली नहीं चली। 

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सोमवार रात को भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। जानकारी मिल रही है कि झड़प के दौरान भारत और चीन के जवान डंडों और पत्थरों से लड़े। दो परमाणु संपन्न देशों के बीच पत्थरों और लाठी-डंडों से लड़ाई की बात सुनकर थोड़ा अटपटा लग सकता है।    

पाक संग गोलीबारी आम बात
वहीं पाक सीमा पर गोलीबारी बहुत ही आम बात हो गई है। पाकिस्तान की ओर से आए दिन सीजफायर का उल्लंघन किया जाता है, जिसके जवाब में भारत को भी कार्रवाई करनी पड़ती है। एलओसी पर आए दिन जवान शहीद होते हैं। इसके बावजूद पाक अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। 
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भारत और चीन के बीच खास सहमति
दरअसल, भारत और चीन ने आपस में तय किया था कि मतभेद कितने ही हों, लेकिन सीमा पर इसका असर नहीं होना चाहिए। सहमति बनी कि सीमा पर तैनात सैनिकों के पास हथियार नहीं होंगे। रैंक के अनुसार जिन अधिकारियों के पास बंदूक होंगी भी तो उनका मुंह जमीन की तरफ होगा। इसी वजह से आए दिन सैनिक बिना हथियारों के ही अपने इलाके से चीनी सैनिकों को खदेड़ते हैं। इसके लिए जवानों को खास तरह की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि किसी भी सूरत में हथियार का इस्तेमाल न हो।   

हाल में चीन ने अपनाया है आक्रामक रुख 
जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि जब संबंध अच्छे होंगे, तब सीमा के मसले को सुलझाया जाएगा। मगर पिछले महीने से अचानक चीन ने सीमा पर आक्रामक रुख अपना लिया है। पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना चार जगहों पर घुसपैठ की कोशिश कर चुकी है। एलएसी पर बड़ी संख्या में सैनिक, वाहन और हथियार पहुंचाए जा रहे हैं। 

भारत-चीन 1993 शांति समझौता
साल 1993 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने चीन का दौरा किया और दोनों पक्षों ने सीमा शांति के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
भारत और चीन के बीच आपसी सीमा विवाद को निपटाने के लिए 1993 में हुई संधि में यह तय हुआ कि दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर गश्त के दौरान हथियार का इस्तेमाल नहीं करेंगी।

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