आईटीबीपी ने इसका तोड़ भी निकाल लिया। बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के दौरान दोनों देशों के जवानों के बीच जब कहासुनी होती है तो उसमें बहुत सामान्य सा विषय होता है। जैसे, आप हमारी सीमा में घुस आए हो। यहां से बाहर चले जाएं। ये सीमा हमारी है। ये इलाका तुम्हारा नहीं है। नमस्कार, आप ठीक हैं, तेज हवा चल रही है, अपने कमांडर से बात कराओ, बेवजह विवाद मत बढ़ाओ, दोनों देश मित्र हैं, सीमा पर विवाद ठीक नहीं है। संयम से काम लें। धक्कामुक्की की जगह बातचीत का व्यवहार रखें। इस तरह के करीब 80 शब्द पेट्रोलिंग पर गए हर जवान को सिखा दिए गए। इसका सार्थक नतीजा भी देखने को मिला।
आईटीबीपी की बेसिक ट्रेनिंग में शामिल हुई मंदारिन
आईटीबीपी ने अब चीन की भाषा 'मंदारिन' को अपने बेसिक कोर्स में शामिल कर लिया है। बल के पास लगभग पौने दो सौ मास्टर ट्रेनर हैं। इन्होंने जेएनयू, विदेशी भाषा संस्थान, तेजपुर एवं सांची यूनिवर्सिटी आदि संस्थानों से कोर्स किया है। इस कोर्स की अवधि एक साल से ज्यादा रही है। इन मास्टर ट्रेनरों द्वारा सभी जवानों और अफसरों को बेसिक स्तर पर मंदारिन भाषा सिखाई जा रही है। अभी तक आईटीबीपी ने लगभग 6500 जवानों और अफसरों को 'मंदारिन' का ज्ञान करा दिया है। ट्रेनिंग के दौरान जवानों को, जिस तरह से ड्रिल, शारीरिक अभ्यास, बॉर्डर गार्डिंग नॉलेज या नेचर ऑफ जॉब से जुड़ा अध्ययन कराया जाता है, वैसे ही उन्हें चीनी भाषा पढ़ाई जाती है। भाषा सिखाने के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि जल्दबाजी में कोई ऐसा शब्द न निकल जाए, जिससे किसी शब्द का उल्टा अर्थ निकल जाए। यही वजह है कि जवानों को बार-बार अभ्यास कराया जाता है। इसके लिए संचार के ऑडियो-वीडियो माध्यमों की मदद लेते हैं।