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चीन से तनाव और सेना कमांडरों की बेनतीजा बातचीत के बीच दो दिन के लेह दौरे पर सेना प्रमुख

Thu, 03 Sep 2020 11:31 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच, गुरुवार को  सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे लद्दाख क्षेत्र की फॉरवर्ड लोकेशन का दो दिवसीय दौरा करेंगे। वे यहां फील्ड कमांडरों के साथ तैनाती और सैन्य तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा प्रमुख रणनीतिक इंफ्रा परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में रिपोर्ट लेंगे। यह जानकारी सेना के सूत्रों ने दी है।

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सेना के सूत्रों ने बताया कि दो दिवसीय यात्रा के दौरान सेना प्रमुख उन सैनिकों के परिचालन तैयारियों की भी समीक्षा करेंगे जो तीन महीने से अधिक समय से चीन के सैनिकों के साथ गतिरोध वाले क्षेत्रों में तैनात हैं।

पेंगोंग में भारत की मजबूत स्थिति
पूर्वी लद्दाख में चीन की उकसाने वाली कार्रवाई को नाकाम करने के कुछ दिनों बाद भारत ने पेंगोंग त्सो इलाके के दक्षिणी तट पर कम से कम तीन महत्वपूर्ण पर्वत चोटियों पर अपनी उपस्थिति और मजबूत की है। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को इसके बारे में जानकारी दी। एलएसी के भारतीय सीमा के अंदर पेंगोंग झील के उत्तरी तट पर भी एहतियाती उपायों के तहत सैनिकों की तैनाती में कुछ बदलाव किए गए हैं। इलाके में तनाव बना हुआ है। 
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चीनी कोशिशों के मद्देनजर भारतीय सेना ने 3,400 किमी लंबे एलएसी पर अपने सभी अग्रिम सैन्य ठिकानों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के लिए अलर्ट कर दिया है। गलवां घाटी झड़प के बाद भारत ने अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार प्रणाली भेजी हैं। सोमवार को भारतीय सेना ने कहा कि चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरमियानी रात पेंगोंग झील के दक्षिण तट पर यथास्थिति में एकतरफा तरीके से बदलाव करने के लिए ‘उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां’ कीं।
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सेना कमांडरों की बातचीत बेनतीजा
वहीं सूत्रों ने बताया कि तनाव घटाने के लिए दोनों पक्षों के सेना कमांडरों की बुधवार को हुई एक और दौर की वार्ता असफल रही। यह बातचीत करीब सात घंटे चली। सूत्रों ने यह भी बताया कि सोमवार और मंगलवार को छह घंटे से अधिक समय तक इसी तरह की वार्ता हुई, लेकिन कोई ‘ठोस नतीजा’ नहीं निकल सका। उन्होंने बताया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में कई पर्वत चोटियों और स्थानों पर उपस्थिति बढ़ा कर पिछले कुछ दिनों में रणनीतिक बढ़त हासिल की है। क्षेत्र में यथास्थिति में बदलाव करने की चीन की नाकाम कोशिशों के मद्देनजर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई है।

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