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किसी के सिर बंधना था सेहरा, तो कोई नहीं देख सका बच्ची का चेहरा, भावुक कर देंगी शहादत की ये नौ कहानियां

Wed, 17 Jun 2020 08:16 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चीन की सीमा पर शहीद जवान - फोटो : सोशल मीडिया
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एक सैनिक, सीमा पर हमारी सुरक्षा के लिए बर्फ से लदे पहाड़, धूप से तपती धरती और बारिशों की तेज बौछारों के बीच अपनी बाज जैसी तेज नजरों को दुश्मनों पर हर समय टिकाए रखता है। उस वक्त उसके मन में देश के प्रति समर्पण के अलावा कई और ख्यालों में भी डूबा रहता हैं, जैसे- चिंता पिता के इलाज की, घर की टूटी छत की मरम्मत की, बहनों की शादी की, चिंता उस नन्ही बच्ची या बच्चे की एक झलक की, जिसे वो इस बार की छुट्टियों में घर जाकर अपनी गोद में भर लेना चाहता है।

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ख्याल उस पत्नी का, जो हर रोज उसकी लंबी उम्र के लिए हजारों मन्नतें मांगती है। या फिर अपनी होने वाली पत्नी से मिलने की व्याकुलता, जिसकी तस्वीर वो हर रोज अपने फोन में देखता है। कितनी जिम्मेदारियां, कितने सपने और अथाह साहस को अपने कंधे पर उठाकर वो सैनिक बस अपने देश की सुरक्षा में न्यौछावर हो जाता है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच सोमवार रात लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए। यहां पढ़िए, इन्हीं में से नौ शहीदों की वो कहानियां, जिसे पढ़ आपकी आखों में आंसू आ जाएंगे।

बिहार के सुनील कुमार

बिहार के बिहटा में तारा नगर के शिकरिया के जवान सुनील कुमार भी इस झड़प में शहीद हुए। 35 साल के सुनील जल्द ही छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। उन्होंने कुछ दिन पहले फोन पर अपनी मां से कहा था कि इस बार पिताजी का इलाज करवाना है। मां रोते हुए कह रही हैं अब तो वह खुद चला गया, अब कौन इलाज करवाएगा।

शहीद दीपक की आठ  महीने पहले हुई थी शादी

मध्यप्रदेश के रीवा जिले के फरेहदा गांव के रहने वाले 21 साल के दीपक सिंह ने भी देश के लिए बलिदान दिया है। सेना के अधिकारियों ने यह सूचना दीपक के पिता को मंगलवार रात फोन पर दी। जवान बेटे की शहादत की खबर से पूरे गांव में मातम पसर गया है। दीपक की शादी आठ महीने पहले ही हुई थी। दीपक के पार्थिव शरीर को गुरुवार को रीवा और फिर उनके गांव फरेहदा लाया जाएगा। 

मां-बाप के इकलौते बेटे थे गणेश 

छत्तीसगढ़ के जवान गणेश कुंजाम भी इस हिंसक झड़प में शहीद हुए हैं। कांकेर के कुरुटोला गांव के रहने वाले गणेश की एक महीने पहले ही चीन सीमा पर तैनाती हुई थी। गणेश हिंसक झड़प में बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन नहीं बच पाए। गरीब परिवार से आने वाले गणेश कुंजाम मां-बाप के इकलौते बेटे थे। 27 साल के गणेश 12वीं के बाद ही सेना में भर्ती हो गए थे। पिछली बार जब वो छुट्टी में घर आए थे, तो उनकी शादी तय कर दी गई थी।

एक साल पहले शादी के बंधन में बंधे थे अमन 

हिंसक झड़प में समस्तीपुर के जवान अमन कुमार सिंह भी शहीद हुए हैं। अमन सुल्तानपुर गांव के रहने वाले थे। उनकी शादी एक साल पहले ही हुई थी। शहादत की खबर मिलने के बाद से अमन की पत्नी सदमे में हैं। अमन के पिता और परिवार के अन्य लोगों के भी आंसू थम नहीं रहे हैं। 

पंजाब के गुरतेज सिंह

पंजाब के मानसा के जवान गुरतेज सिंह भी चीन की सीमा पर शहीद भी हो गए। अभी तीन दिन पहले ही गुरतेज सिंह के भाई की शादी हुई, लेकिन सीमा पर तनाव की वजह से वह अपने भाई की शादी में शामिल नहीं हो पाए थे।

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हमीरपुर अंकुश ठाकुर शहीद

सिपाही कुंदन ओझा - फोटो : अमर उजाला

भारत और चीन के बीच हुई झड़प में हमीरपुर जिले के 21 साल के अंकुश ठाकुर शहीद हुए हैं। अंकुश की शहादत की खबर सेना मुख्यालय से ग्राम पंचायत कड़ोहता को फोन पर दी गई। इसके बाद हमीरपुर जिले में मातम पसर गया। शहीद अंकुश ठाकुर साल 2018 में पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 10 माह पहले ही अंकुश ने ट्रेनिंग पूरी कर सेना ज्वाइन की थी।

कुंदन के कुमार छह और चार साल के दो बेटे

पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में भारत और चीन के जवानों के बीच हुई झड़प में बिहार के सिपाही कुंदन कुमार भी शहीद हो गए। कुंदन कुमार बिहार के सहरसा जिले के बिहरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आरन गांव के रहने वाले थे। उनकी शहादत की खबर के बाद से उनके परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, कुंदन कुमार के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। मेरे बेटे ने राष्ट्र के लिए अपना बलिदान दिया। मेरे दो पोते हैं, मैं उन्हें भी सेना में भेजूंगा। 2012 में कुंदन सेना में शामिल हुए थे और 2013 में उनकी शादी हुई थी। कुंदन के छह और चार साल के दो बेटे हैं।

बेटी का चेहरा भी नहीं देख पाए कुंदन

हिंसक झड़प में कुंदन कुमार ओझा (26) शहीद हुए हैं। शहीद कुंदन झारखंड के साहेबगंज जिले के डिहारी गांव के रहने वाले थे। शहीद कुंदन के दो भाई और एक बहन हैं। 18 दिन पहले ही उनकी बेटी का जन्म हुआ है, लेकिन कुंदन अपनी बेटी का चेहरा तक नहीं देख पाए।

21 साल के गणेश 

झारखंड के बहरागोड़ा ब्लॉक के कोसाफलिया निवासी गणेश हांसदा भी शहीद हुए हैं। उनकी उम्र 21 साल थी। शहीद गणेश के परिजन के अनुसार मंगलवार रात उन्हें लेह से फोन आया था और सूचना दी गई। शहीद गणेश के बड़े भाई दिनेश हांसदा ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले गणेश की घरवालों से बात हुई थी।

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