कोरोना संक्रमण से देश में 50 लोगों की जान जा चुकी है और अभी भी हजारों लोगों का इलाज चल रहा है। कोरोना को थर्ड स्टेज में पहुंचने से रोकने के लिए पूरे देश में युद्ध स्तर पर तैयारियां चल रही हैं, लेकिन इससे निबटने के लिए क्वारंटीन या आइसोलेट होने को ही अब तक सबसे बेहतर तरीका बताया जा रहा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जापान की बीमार लोगों को खुद को आइसोलेट करने की संस्कृति इस समय दुनिया के हर व्यक्ति को अपने स्तर पर ही अपना लेनी चाहिए। इससे न सिर्फ व्यक्ति खुद को किसी भी संक्रमण से बचा सकता है, बल्कि कोरोना के संक्रमण से दूसरों को भी बचा सकता है।
क्या है जापान का तरीका
जापान में होमियोपैथी की एक्सपर्ट डॉक्टर होसातो ने अमर उजाला को बताया कि उनके यहां जब भी कोई व्यक्ति किसी वजह से बीमार पड़ता है, वह अपने ही घर के किसी एक कमरे में खुद को परिवार के शेष सदस्यों से अलग-थलग कर लेता है। इससे एक तरफ तो वह किसी अन्य संक्रमण का शिकार नहीं होता, दूसरे उसके कारण परिवार या आसपास के किसी अन्य सदस्य को कोई बीमारी नहीं फैलती।
बहुत जरूरी होने पर ही वह बाहर आता है और बाहर जाने के समय भी आवश्यक रूप से वह फेसमास्क का इस्तेमाल करता है। यह जापान की संस्कृति है और वहां के लोग स्वयं ही इसका पालन करते हैं। इसके लिए उन्हें बाध्य नहीं करना पड़ता।
जापान का तरीका कितना कारगर
संक्रमित या बीमार व्यक्ति को आइसोलेट करने का यह तरीका कोरोना का संक्रमण रोकने में कितना कारगर रहा है, इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि जापान में अभी भी कुल कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या (एक अप्रैल तक) 2178 तक ही पहुंच पाई है, जबकि उसके आसपास के देशों में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो चुकी है। इसमें 225 नये केस जुड़े हैं।
जापान में कोरोना के कारण कुल 57 लोगों की मौत हुई है। लेकिन विशेष बात यह है कि कुल नए मामलों में घरेलू संक्रमण का केवल एक मामला सामने आया है और यह यहां के लोगों का खुद को आइसोलेट करने की संस्कृति की वजह से हुआ है।
भारत में कितना संभव
आयुष मंत्रालय में सलाहकार डॉक्टर नवल ने कहा कि इस तरह की संस्कृति देश को किसी महामारी से बचाने में बहुत कारगर हो सकती है। लेकिन भारत की संस्कृति में भी इसी प्रकार के अनेक व्यवहार रहे हैं जिन्हें अपनाकर देश को अनेक बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिना स्नान किए भोजन न बनाना, बाहर से आने पर जूते को बाहर ही उतारना और हाथ-पैर धुलकर ही घर में प्रवेश करना हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
लेकिन आधुनिकता के नाम पर इन चीजों को पिछड़ा होने से जोड़ दिया गया। जबकि ये हमारे घर-परिवार को बाहर के संक्रमण से बचाने का अहम तरीके रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया नमस्कार को अपना रही है, हमें हमारी संस्कृति की अच्छी चीजों को अपनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।