विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि जॉर्ज सोरोस (George Soros) और संयुक्त राष्ट्र लोकतंत्र कोष (UNDEF) से जुड़े मुद्दे अलग-अलग हैं और इन्हें मिलाया नहीं जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यूएनडीईएफ द्वारा सोरोस के संगठनों को वित्तपोषित करने की एक रिपोर्ट के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए यह बात कही।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बागची ने कहा कि सोरोस के संगठन और यूएनडीईएफ अलग-अलग मुद्दे हैं। दोनों को मिलाने का प्रयास किया गया है जिससे स्थिति दिग्भ्रमित हुई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न गतिविधियों में भाग लेता है और उन्हें बढ़ावा देता है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के कई स्वैच्छिक फंड और कार्यक्रमों में योगदान देना शामिल है और यूएनडीईएफ उनमें से एक है।
उन्होंने आगे बताया कि यह कोष (यूएनडीईएफ) भारत सहित लगभग 45 सदस्य देशों से धन प्राप्त करता है। यूएनडीईएफ प्राप्त धन को दुनिया भर में कई परियोजनाओं को आवंटित करता है, इन परियोजनाओं को विभिन्न संगठनों द्वारा निष्पादित किया गया है। उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर की बातों को उद्धृत करते हुए कहा कि "लोकतंत्र में लोगों की बातों का सम्मान किया जाना चाहिए, उन्हें कम नहीं आंका जाना चाहिए।
सोरोस के संगठन (ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से संबंधित) के भारत में पैसे भेजने के सवाल पर बागची ने कहा कि उन्हें (सोरोस के संगठनों को) यहां पैसे भेजने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, जहां तक भारत में पैसा भेजने वाले किसी भी संगठन के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की बात है तो संबंधित एजेंसियां कानून के मुताबिक उपयुक्त कार्रवाई करती हैं।
कानूनी प्रक्रिया के तहत कतर में हिरासत में लिए गए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को भारत कांसुलर और कानूनी सहायता मुहैया कर रहा है और खाड़ी देश के अधिकारियों के साथ भी बातचीत कर रहा है। गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि आठ भारतीयों से संबंधित मामले में सुनवाई मई महीने की शुरुआत में तय की गई है। यह अब कानूनी प्रक्रिया में है।
बागची ने कहा कि मैं इस बात पर ध्यान दिलाना चाहता हूं कि हम हिरासत में लिए गए इन भारतीयों की सहायता के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत कांसुलर सहायता के साथ-साथ कानूनी सहायता भी प्रदान कर रहे हैं। हम कतरी अधिकारियों के साथ भी बातचीत कर रहे हैं और दोहा में हमारा दूतावास उनके परिवारों के संपर्क में है।
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उन पर लगे आरोपों का खुलासा नहीं हुआ है। बागची ने कहा, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं है। कानूनी प्रक्रिया के सामने आने के बाद शायद होगा। गौरतलब है कि नौसेना के आठ पूर्व अधिकारी एक निजी फर्म के लिए काम कर रहे थे। उन्हें पिछले साल अक्टूबर में दोहा में हिरासत में लिया गया था।
बागची ने तंजानिया में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की स्थापना के प्रस्ताव पर भी एक सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि कुछ जगहों पर चर्चा चल रही है, तंजानिया उनमें से एक हो सकता है और एक बार पुष्टि हो जाने के बाद, हम आपके साथ खुशखबरी साझा करेंगे।
भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जी-20 बैठकों की मेजबानी पर पाकिस्तान की आपत्ति को खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि ये सम्मेलन देश भर में आयोजित किए जा रहे हैं और इन्हें दो केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित करना स्वाभाविक है। दोनों ही भारत के अभिन्न और अविच्छेद्य अंग हैं। भारत मई में श्रीनगर में जी20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक की मेजबानी कर रहा है, जबकि लेह में इस महीने के अंत में यूथ एंगेजमेंट ग्रुप की बैठक होने वाली है। पाकिस्तान ने मंगलवार को श्रीनगर में जी20 वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित करने के भारत के फैसले की आलोचना की थी। उसने लेह में यूथ-20 फोरम के कार्यक्रम पर भी आपत्ति जताई थी।