नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत सदस्य देशों के साथ खुलकर बातचीत कर रहा है। मकसद सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाना और संयुक्त घोषणा जारी करना है। भारत इस समय समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
पश्चिम एशिया संघर्ष को कूटनीति के जरिए सुलझाने की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में पश्चिम एशिया के संघर्ष को संवाद और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर रहेगा। क्षेत्रीय अखंडता, समुद्री व्यापार की निर्बाध आवाजाही और नागरिकों व नागरिक ढांचे की सुरक्षा भी चर्चा के प्रमुख विषय हैं।
मई में क्यों नहीं बनी थी एक राय?
मई में सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तीखे मतभेद सामने आए थे। इसके चलते संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। भारत ने तब अध्यक्ष का बयान और परिणाम दस्तावेज जारी किया था। इसमें दो ऐसे अनुच्छेद थे, जिन पर सभी देशों की सहमति नहीं बन पाई थी।
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होर्मुज मार्ग से तेल आपूर्ति प्रभावित
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है। वैश्विक पेट्रोलियम प्रवाह का करीब 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है।
25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की अध्यक्षता का विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानवता पहले’ के दृष्टिकोण पर आधारित है। इस साल भारत के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम हुए हैं।
11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह
ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं। यह समूह दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, करीब 40 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।