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इराक और सीरिया के बाद सबसे ज्यादा भारत में मारे जाते हैं पत्रकार

Wed, 06 Sep 2017 02:14 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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पत्रकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ प्रदर्शन
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भारत में पत्रकार गौरी लंकेश सहित हर उस पत्रकार को भ्रष्टाचार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की सजा अपनी मौत से चुकानी पड़ी है।  विश्वभर में पत्रकारों की हत्या पर की गई रिसर्च पर नजर डालें तो भारत मीडियाकर्मियों के लिए तीसरा सबसे खतरनाक देश बन चुका है। जबकि इराक पहले और सीरिया दूसरे स्थान पर है।
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पत्रकारों की हत्याओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016 में 122 पत्रकारों को दुनियाभर में मौत के घाट उतारा गया जबकि 2015 में यह आंकड़ा 110 रहा है। विश्वभर में मारे गए पत्रकारों में 2016 में अफगानिस्तान (13), मैक्सिको (11), यमन (8), गौटेमाला (6) सीरिया (6) मौत के घाट उतारे गए जबकि 2015 में इराक 11, सीरिया 10 फ्रांस 8, यमन 8, मैक्सिको 8, दक्षिण सुडान 7, फिलिपींस 7 पत्रकारों को मौत के घाट उतारा गया था।  

2015 में जारी रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर की सालाना रिपोर्ट में भारत को पत्रकारों के लिए तीसरा सबसे खतरनाक राष्ट्र माना है। भारत के बाद इराक और सीरिया ही ऐसे देश हैं जहां लड़ाई के दौरान पत्रकार बड़ी संख्या में मारे गए हैं। 
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पिछले दो वर्षों में भारत में 15 से अधिक पत्रकार मारे गए जिनमें 2015 में 9 और 2016 में 6 से अधिक पत्रकारों को मारा गया। इनमें से अधिकतर पत्रकारों की मौत के कारणों का पता ही नहीं चल सका। 
आईएफजे की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबली मारे गए 122 में से  93 मीडियाकर्मी की मौत हत्या, बम विस्फोट और गोलीबारी में हुई। वहीं दूसरे पत्रकारों की किसी न किसी वजह से रिपोर्टिंग के दौरान जान से हाथ धोना पड़ा है। 
 
 
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पत्रकारों ने रिपोर्टिंग मे सच लिखा और उन्हें जान से हाथ धोना पड़ा

गौरी लंकेश
 मंगलवार की रात गौरी लंकेश को उनके घर के बाहर ही उनकी हत्या कर दी गई। गौरी की हत्या के बाद एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगा है। विश्वभर के पत्रकारों की जान को खतरा बना हुआ है। फ्रांस में चार्ली एब्दो पत्रिका के कई पत्रकारों को पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छापने पर मार दिया गया था।  

भारत में देश का चौथा स्तंभ मानी जाने वाली पत्रकारिता की नींव हिल रही है। पिछले कुछ दिनों में पत्रकारों की हत्याओं पर नजर डालें तो कहीं न कहीं पत्रकारों ने किसी ताकतवर के खिलाफ आवाज उठाई थी।  पिछले कुछ दिनों में हुई पत्रकारों की हत्या पर बात करें तो बिहार में ही तीन पत्रकारों को गोली मारी गई। पत्रकार राजदेव रंजन की मौत 13 मई 2016 को ऑफिस से घर लौटते समय गोली मारी गई थी।  
राजदेव सीवान में दैनिक हिंदुस्तान के पत्रकार थे। राजदेव की हत्या के  मामले में सीबीआई की जांच चल रही है। राजदेव की हत्या में बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन पर शक है। वहीं बिहार के ही हिंदी दैनिक पत्रकार ब्रजकिशोर ब्रजेश की बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। ब्रजेश को सात गोलियां लगी थी। उनकी हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया। वहीं बिहार के सासाराम में भी एक पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। 

जबकि मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित व्यापम घोटाले में भी पत्रकारों की जीवन को लील लिया है। मई 2015 में व्यापम पर विशेष कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की मौत हो गई। मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अक्षय के हाथों में व्यापम से जुड़े कुछ सुराग हाथ लग गए थे।

जबकि उत्तर प्रदेश के पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत बहुत ही दर्दनाक थी। जगेंद्र को जिंदा जला दिया गया था। जगेंद्र ने किसी अखबार में नहीं बल्कि अपने फेसवुक वॉल से ही उत्तर प्रदेश के एक बाहुबली नेता के खिलाफ अभियान चला दिया था।  जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले में पत्रकार संदीप कोठारी का अपहरण कर उसे जिंदा जला दिया गया था। 
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