पत्रकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ प्रदर्शन
भारत में पत्रकार गौरी लंकेश सहित हर उस पत्रकार को भ्रष्टाचार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की सजा अपनी मौत से चुकानी पड़ी है। विश्वभर में पत्रकारों की हत्या पर की गई रिसर्च पर नजर डालें तो भारत मीडियाकर्मियों के लिए तीसरा सबसे खतरनाक देश बन चुका है। जबकि इराक पहले और सीरिया दूसरे स्थान पर है।
पत्रकारों की हत्याओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2016 में 122 पत्रकारों को दुनियाभर में मौत के घाट उतारा गया जबकि 2015 में यह आंकड़ा 110 रहा है। विश्वभर में मारे गए पत्रकारों में 2016 में अफगानिस्तान (13), मैक्सिको (11), यमन (8), गौटेमाला (6) सीरिया (6) मौत के घाट उतारे गए जबकि 2015 में इराक 11, सीरिया 10 फ्रांस 8, यमन 8, मैक्सिको 8, दक्षिण सुडान 7, फिलिपींस 7 पत्रकारों को मौत के घाट उतारा गया था।
2015 में जारी रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर की सालाना रिपोर्ट में भारत को पत्रकारों के लिए तीसरा सबसे खतरनाक राष्ट्र माना है। भारत के बाद इराक और सीरिया ही ऐसे देश हैं जहां लड़ाई के दौरान पत्रकार बड़ी संख्या में मारे गए हैं।
पिछले दो वर्षों में भारत में 15 से अधिक पत्रकार मारे गए जिनमें 2015 में 9 और 2016 में 6 से अधिक पत्रकारों को मारा गया। इनमें से अधिकतर पत्रकारों की मौत के कारणों का पता ही नहीं चल सका।
आईएफजे की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबली मारे गए 122 में से 93 मीडियाकर्मी की मौत हत्या, बम विस्फोट और गोलीबारी में हुई। वहीं दूसरे पत्रकारों की किसी न किसी वजह से रिपोर्टिंग के दौरान जान से हाथ धोना पड़ा है।