भारत हज प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ऑनलाइन आवेदन, ई वीजा, हज मोबाइल एप, ई मसीहा स्वास्थ्य सुविधा, मक्का मदीना में ठहरने और यातायात से जुड़ी सभी जानकारी देने वाले ‘ई लगेज प्री टैगिंग’ से अगले साल हज यात्रा पर जाने वाले दो लाख भारतीय मुस्लिमों को जोड़ा गया है। नकवी ने रविवार को सऊदी अरब के हज व उमराह मंत्री मोहम्मद सालेह बिन ताहेर के साथ द्विपक्षीय हज 2020 समझौते पर हस्ताक्षर किए।
नकवी ने कहा कि पहली बार एयरलाइंस द्वारा डिजिटल प्री टैगिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे हज यात्रियों को भारत में ही सभी प्रकार की जानकारियां मिल जाएंगी। मसलन हज यात्रियों को मक्का मदीना में किस इमारत के किस कमरे में ठहरने और हवाई अड्डे पर उतरने के बाद किस नंबर की बस लेनी होगी, इसकी जानकारी पहले ही मिल जाएगी। यात्रियों के सिम कार्ड को हज मोबाइल एप से लिंक किया जाएगा, जिससे उन्हें हज से जुड़ी नवीनतम जानकारियां मिलती रहेंगी। इस साल 100 टेलीफोन लाइन का सूचना केंद्र मुंबई के हज हाउस में शुरू किया गया है।
आपात स्थिति में मिलेगी मेडिकल सेवा
नकवी ने कहा कि एक तरफ भारत में सभी यात्रियों को हेल्थ कार्ड दिए जाने की व्यवस्था की गई है, वहीं सऊदी अरब में उन्हें ‘ई मसीहा स्वास्थ्य सुविधा’ दी जाएगी। इसमें प्रत्येक हज यात्री की सेहत से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। आपात स्थिति में फौरन उन्हें मेडिकल सहायता दी जा सकेगी।
हज ग्रुप ऑर्गेनाइजर्स को पोर्टल से जोड़ा
मंत्री ने कहा कि हज समूह आयोजकों को भी सौ फीसदी डिजिटल कर पोर्टल http://haj.nic.in/pto/ से जोड़ा गया है। इसमें सभी अधिकृत आयोजकों के पैकेज की जानकारी दी गई है। अगले साल दो लाख भारतीय मुसलमान बिना किसी हज सब्सिडी के हज यात्रा पर जायेंगे। मंत्री के मुताबिक 30 नवंबर तक भारतीय हज कमेटी को कुल 1,76,714 आवेदन मिले थे। आवेदन की अंतिम तारीख पांच दिसंबर है।