एक दशक पहले भारत में शिक्षा का अधिकार कानून आया था। उसके बाद से प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य को लगभग 100 प्रतिशत तक हासिल कर लिया गया है लेकिन अब जो समस्या हमारे सामने खड़ी है वह है शिक्षा की गुणवत्ता। नीति आयोग द्वारा जारी की गई अध्ययन रिपोर्ट से पता चला है कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए हमें बहुआयामी दृष्टिकोण के जरिए पारंपरिक रणनीतियों में बदलाव करना होगा।
1. एक दूसरे से कम दूरी पर स्थित विद्यालय का एकीकरण किया जाए और परिवहन और भत्ते प्रदान किए जाएं।
2. जिन स्थानों पर शिक्षकों की संख्या ज्यादा है वहां से उन्हें उन जगहों पर स्थानांतरित किया जाए जहां उनकी कमी है। शिक्षकों के कैडर की पुन: सरंचना की जाए और शिक्षक भर्ती में बेहतर योजना और सख्त प्रक्रिया के जरिए ज्यादा निवेश किया जाए।
3. माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा पर पुनर्विचार किया जाए। देश में मौजूद लगभग 8,000 माध्यमिक विद्यालयों में एक या दो ट्रेड की व्यावसायिक शिक्षा दी जाती है लेकिन अब वह पुरानी हो चुकी है।