भारत और अमेरिका के बीच हुए अहम लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के मिलिट्री बेस का इस्तेमाल कर सकेंगे। अमेरिकी दौरे पर गए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने समकक्ष ऐश्टन कार्टर के साथ मिलकर इस समझौते को अंतिम रूप दिया। दूसरी ओर इस समझौते पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने संपादकीय में लिखा है, 'बेशक यह अमेरिका-इंडिया मिलिट्री साझेदारी में लंबी छलांग हो। लेकिन इससे भारत अमेरिका का पिछलग्गू बन रहा है। फोर्ब्स ने इस पैक्ट को 'वॉर पैक्ट' बताते हुए कहा है कि भारत अपने शीत युद्ध के साथी रूस के पाले से निकल कर अमेरिका की तरफ जा रहा है।'
जानिए आखिर क्यों खास है यह समझौता...
-लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) समझौते से सैन्य बलों की कार्य क्षमता बढ़ेगी, खास तौर पर मानवीय आपदा के समय या आपदा बचाव में इससे फायदा होगा।
-यह समझौता अमेरिकी और भारतीय सेना के बीच लॉजिस्टिक सहायता, सप्लाई और सर्विस में मदद करेगी।
-इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के युद्धक बेड़ों से ईंधन, पानी और भोजन जैसे संसाधनों की शेयरिंग कर सकेंगे।
-यह साफ कर दें कि इस डील के तहत भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की कोई बात नहीं है।
समझौते पर दोनों देशों का साझा बयान
भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री ऐश्टन कार्टर ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों को 'व्यावहारिक संपर्क और आदान-प्रदान' के बेहतर अवसर प्रदान करेगा। दोनों देशों ने साझा बयान देकर समझौते का महत्व बताया। इस बयान के मुताबिक, 'यह व्यवस्था रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार सहयोग में इनोवेटिव और मॉडर्न अवसर प्रदान करेगी। यह साझा मूल्यों और हितों पर आधारित समझौता है।'