भारत और दक्षिण कोरिया एकसाथ मिलकर सैन्य उपकरणों का उत्पादन और निर्यात करेंगे दोनों देशों के बीच बनी इस सहमति को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत के सैन्य उपकरणों और हथियारों का निर्यातक बनने की राह में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
दोनों देशों में बनी सहमति, खुफिया जानकारी, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी करेंगे आपसी सहयोग
अधिकृत सूत्रों का कहना है कि रक्षा व सुरक्षा गठबंधन के व्यापक विस्तार के तहत उठाए जा रहे इस कदम में खुफिया जानकारियों को साझा करने और साइबर व अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया गया है। सूत्रों ने बताया कि आपसी सहयोग से जुड़े ये निर्णय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके कोरियाई समकक्ष सू वूक के बीच शुक्रवार को हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में लिए गए।
बैठक में दोनों पक्ष रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्रों में आपसी रिश्तों को अहम बढ़ावा देने पर सहमत दिखाई दिए। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री वूक बृहस्पतिवार को तीन दिन की भारत यात्रा पर पहुंचे थे। उनके इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा व सैन्य सहयोग बढ़ाना था।
सूत्रों का कहना है कि रक्षा उद्योग सहयोग के तौर पर दोनों पक्षों ने संयुक्त शोध, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इस पर बैठक के दौरान खूब चर्चा की गई। बता दें कि भारत को हथियार व सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में दक्षिण कोरिया भी शामिल है। 2019 में दोनों देशों ने विभिन्न जमीनी व नेवी सिस्टम का मिलकर उत्पादन करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया था।
उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर में निवेश की चाहत
सूत्रों के मुताबिक, वार्ता के दौरान कोरियाई मंत्री ने भारत के दो डिफेंस कॉरिडोर में उपलब्ध अवसरों में भी दिलचस्पी दिखाई। उन्होंने खासतौर पर ‘आत्मनिर्भर भारत पहल’ के तहत संयुक्त उपक्रमों में निवेश करने को लेकर रक्षा मंत्री सिंह से बात की। सरकार देश में दो डिफेंस कॉरिडोर स्थापित करने पर काम कर रही है। इनमें से एक उत्तर प्रदेश में है, जबकि दूसरा तमिलनाडु में। इन्हें स्थापित करने का उद्देश्य रक्षा उद्योग से जुड़ी विभिन्न यूनिटों के बीच आपसी संपर्क सुनिश्चित कराना है।
चीन पर भी की गई बात
सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच क्षेत्र में चीन की सेना के आक्रामक रवैये को लेकर भी बातचीत हुई। राजनाथ सिंह और वूक के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में बहुस्तरीय सहयोग को लेकर भी चर्चा की गई।