उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बतौर राज्यसभा सभापति काम के पहले दिन मंत्रियों और सांसदों से कहा पटल पर दस्तावेज रखते वक्त 'आई बेग टू' ना कहें। हम सब आजाद देश के नागिरक हैं। ऐसे में आई बेग टू बोलने से औपनिवेशिक काल की बू आती है।
जब सदन में कामकाज नहीं होता तो लोग ठगा हुआ महसूस करते हैं
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बृहस्पतिवार को कहा कि विपक्ष की भले ही सदन में जो भी क्षमता हो पर उनकी बात सुनी जानी चाहिए। लेकिन अंतत: सरकार को अपना काम पूरा करना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से कार्यवाही में धैर्य रखने को कहा ताकि सदन में सुचारु कामकाज सुनिश्चित हो सके।
नायडू ने कहा कि जब सदन में सही तरीके से कामकाज नहीं होता तो देश की जनता खुद को ठहा हुआ महसूस करती है। नायडू ने कहा, ‘मेरी राय है कि विपक्ष को उनकी बात रखने देना चाहिए। उन्हें अपना मत पेश करना चाहिए तथा सरकार को इतना धैर्य रखना चाहिए कि वह उनका मत सुन सके और जवाब दे सके।’ उन्होंने राज्यसभा टीवी से कहा, ‘मेरा यह भी मत है कि संख्या बल पर ध्यान दिए बिना विपक्ष को उनकी बात कहने का मौका मिलना चाहिए।
बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत लोकसभा के स्थगन के साथ हुई, जिसे 18 दिसंबर यानि सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।