इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक हुई। मल्लिकार्जुन खरगे इसके अध्यक्ष चुने गए। बिहार के मंत्री और जद(यू) नेता संजय झा के मुताबिक एमके स्टालिन के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनने की पेशकश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकार नहीं किया। समझा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इस दौरान अपनी मंशा व्यक्त की। इसके साथ-साथ अपने लिए राष्ट्रीय नेता तथा भावी प्रधानमंत्री के विकल्प को खुला रखा है। हालांकि बिहार के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने इसे नीतीश कुमार का सपना टूटना बताया है।
नीतीश बहुत बारीक राजनीकि के लिए जाने जाते हैं। वह संयोजक के पद पर संतुष्ट होकर अपनी छवि को किसी पद के लालच जैसे फ्रेम में नहीं फंसाना चाहते। इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा कहते हैं कि नीतीश ने सही निर्णय लिया। सच बात तो यह है कि नीतीश पहले ही संयोजक का काम कर चुके हैं। इंडिया गठबंधन का स्वरुप नीतीश की ही पहल पर शुरू हुआ है। अब तो समय लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए को मुंहतोड़ जवाब देने का है। इसलिए यहां राजनीतिक दलों की एकता जरूरी है। सीटों का तार्किक और समझदारी भरा बंटवारा करके साझा जनसभा और प्रचार की रणनीति तैयार की है। बिहार की राजनीति को समझने वाले अनिरुद्ध तिवारी कहते हैं कि नीतीश ने गठबंधन की बैठक में यही वकालत की है और अपने सुझाव भी इसी दिशा में दिए हैं। कांग्रेस में किसी नेता को संयोजक बनाइए या लालू प्रसाद को जिम्मेदारी दीजिए।
आशंका और अफवाह पर नीतीश कुमार ने लगाया विराम
इंडिया गठबंधन की बैठक में नीतीश कुमार खुद शामिल हुए। उनके साथ जद (यू) के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन (ललन सिंह) और संजय झा थे। राजद की तरफ से लालू प्रसाद यादव और बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव। बैठक के दौरान लालू प्रसाद यादव का नाम आने पर नीतीश कुमार ने राजद प्रमुख को ही संयोजक बनाने का सुझाव दिया। जद(यू) के नेता नीरज कुमार कहते हैं कि इसका अर्थ समझिए। संजय वर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री ने साफ संकेत किया है कि सीटों के बंटवारे के अलावा कहीं कोई दिक्कत नहीं है।
संजय कहते हैं कि मोटे तौर पर सहमति बन गई है। 16 सीटों पर जद(यू), 16 पर राजद चुनाव लड़ेगी। जहानाबाद, झंझारपुर जैसी कुछ सीटों पर कौन लड़ेगा, इसको लेकर चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन जब संख्या पर आपसी सहमति बन गई तो शेष बातें बहुत छोटी हैं। 08 सीटें सीपीएम, कांग्रेस आदि के पाले में हैं। मुझे नहीं लगता है कि अब इसमें कोई बड़ा संदेह रह गया है।
संजय वर्मा, स्वप्निल और नीरज तीनों का कहना है कि भाजपा और भाजपा के खेमे में खड़े कुछ नेता लगातार नीतीश कुमार के बारे में भ्रम पैदा करने में लगे हैं। तरह-तरह की अफवाह उड़ायी जा रही है। मुझे लग रहा है कि नीतीश ने आज सभी के मुंह पर एक बार ताला लगा दिया है।
जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता के सी त्यागी लंबा राजनीतिक अनुभव ही नहीं रखते बल्कि मीडिया में जद(यू) प्रमुख की शान-शौकत को तार्किक तरीके से बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। त्यागी गठबंधन की बैठक के बारे में कहते हैं कि बैठक कामयाब रही। संयुक्त प्रयास, सीट बंटवारा और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज करने पर सहमति बनी। जद(यू) महासचिव ने कहा कि विपक्षी एकता और गठबंधन निर्माण के लिए नीतीश कुमार ने जो किया है, वह किसी संयोजक के पद से बड़ा दायित्व है।
निश्चित रूप से बिहार के मुख्यमंत्री का कद देश के भावी प्रधानमंत्री या गठबंधन के संयोजक का है, लेकिन वह पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें किसी पद का लालच नहीं है। वह विपक्षी एकता, एकजुटता और पूरी ताकत से लोकसभा चुनाव लडऩे के पक्ष में हैं। इसे आज उन्होंने तमाम दलों के नेताओं की तरफ से संयोजक बनाने का प्रस्ताव आने पर इससे मना करके खुद को साबित भी कर दिया।
आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर केसी त्यागी ने कहा कि सामाजिक न्याय और समरसता का आंदोलन ठप पड़ा है। हम इसे धार देंगे। 24 तारीख को पटना में जन नायक कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती मनाई जाएगी। वह सामाजिक न्याय के अगुआ थे। जद(यू) भव्य कार्यक्रम का आयोजन करेगा। इसे हर साल केवल जद(यू) ही करता है, इसलिए इसमें दूसरे दल के नेताओं के आमंत्रण का प्रश्न नहीं है। अभी हम इस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।