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10 साल बाद फिर सजेगा मंच: भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में जुटेंगे कई बड़े नेता, जानें क्या है बैठक का उद्देश्य

Sat, 09 May 2026 10:56 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत 31 मई को नई दिल्ली में होने वाले चौथे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी देशों के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करेगा। 10 साल बाद हो रही इस बैठक में व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य और रक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा होगी। भारत अब अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस सम्मेलन का मुख्य मकसद भारत के 2047 विजन और अफ्रीका के एजेंडा 2063 को जोड़कर साझा विकास करना है।
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अफ्रीकी देशों के लिए भारत बना मददगार। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत और अफ्रीका के रिश्ते अब एक नई ऊंचाई पर पहुंचने वाले हैं। दुनिया भर में तेजी से बदल रहे राजनीतिक हालात और उथल-पुथल के बीच, भारत 31 मई को अफ्रीकी देशों के साथ एक बहुत बड़े और महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। नई दिल्ली में होने वाले इस महामंथन का मुख्य मकसद दोनों पक्षों के बीच दोस्ती, साझेदारी और व्यापार को एक बहुत ही मजबूत आधार देना है। यह एक ऐसा बड़ा और अहम कदम है जिससे भारत और अफ्रीका दोनों मिलकर प्रगति और विकास की एक नई कहानी लिखेंगे। इस सम्मेलन से दोनों को भारी फायदा होने वाला है और यह दुनिया के लिए भी एक बड़ा संदेश होगा।
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भारत और अफ्रीका भविष्य के लिए क्या योजना बना रहे हैं?
इस बड़े शिखर सम्मेलन के अंत में एक अहम घोषणा पत्र भी जारी किया जाएगा, जिसमें भविष्य में साथ मिलकर काम करने का पूरा खाका तैयार होगा। इस योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत के साल 2047 तक पूरी तरह से विकसित देश बनने के सपने और अफ्रीका के विकास मॉडल 'एजेंडा 2063' को एक साथ जोड़ना है। भारत हमेशा से यह कोशिश करता रहा है कि अफ्रीका का विकास वहां के लोगों की जरूरतों के हिसाब से ही हो। यही वजह है कि साल 2018 के बाद से भारत ने कूटनीतिक कदम बढ़ाते हुए अफ्रीका में अपने 17 नए राजनयिक कार्यालय खोले हैं, जिससे अब वहां भारत के कुल 46 कार्यालय हो गए हैं। इससे दोनों के बीच संवाद और सहयोग बहुत आसान हो गया है।

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व्यापार और निवेश के मामले में भारत का क्या दबदबा है?
आज के समय में भारत व्यापार के मामले में अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा साझेदार बन चुका है और वहां पैसा लगाने वाले चोटी के पांच देशों में शामिल है। साल 2024-25 के दौरान भारत और अफ्रीका के बीच 81.99 अरब डॉलर का बहुत बड़ा व्यापार हुआ है। इसमें भारत ने 42.6 अरब डॉलर का पेट्रोलियम और दवाइयों जैसा सामान अफ्रीका को बेचा है और 39.2 अरब डॉलर का सामान वहां से खरीदा है। इसके साथ ही, 1996 से लेकर 2025 तक अफ्रीका में भारत का कुल निवेश करीब 80 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारतीय कंपनियों ने वहां ऊर्जा, खनन, टेलीकॉम और खेती जैसे अहम क्षेत्रों में अपनी बहुत ही मजबूत जगह बना ली है।
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अफ्रीकी देशों के विकास में भारत कैसे बन रहा मददगार?
व्यापार से अलग भारत अफ्रीकी देशों की जमीनी तरक्की में भी बहुत बड़ा और अहम योगदान दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अब तक 41 अफ्रीकी देशों को बिजली, पानी की सप्लाई, परिवहन और खेती से जुड़े प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए 10 अरब डॉलर से ज्यादा का आसान कर्ज (लाइन ऑफ क्रेडिट) दिया है। इसमें से 4.5 अरब डॉलर की लागत वाले 220 प्रोजेक्ट पूरी तरह से सफल भी हो चुके हैं। इसके अलावा, भारत अपनी एक खास योजना के तहत अफ्रीका के 33 सबसे कम विकसित देशों को उनके 98.2 प्रतिशत सामान पर बिना टैक्स के व्यापार करने की बड़ी और शानदार छूट भी दे रहा है, जिससे उन गरीब देशों को बहुत ज्यादा फायदा पहुंच रहा है।

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