भारत 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन डोज लगाकर इतिहास रच दिया है। देश को यह मील का पत्थर छूने में भले ही करीब 10 महीनों का समय लगा हों, लेकिन ये पिछले 2-3 महीनों में कोरोना वैक्सीनेशन की तेज रफ्तार का कमाल ही है कि भारत इतनी जल्दी इस मुकाम को हासिल कर पाया। चीन के बाद भारत सबसे ज्यादा कोरोना वैक्सीन की खुराक देने वाले दूसरा देश बन गया है। भारत ने 276 दिनों में 100 करोड़ कोविड वैक्सीनेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है, हालांकि, देश में वैक्सीन के आते ही उसपर राजनीति भी शुरू हो गई।
इसपर ऐसी राजनीति होने लगी कि वैक्सीन पर भरोसा किया जाए या नहीं, या फिर वैक्सीन पहले कौन लगवाएगा जैसी कई बातें सामने आने लगी थीं। साथ ही देश में कई सवाल भी खड़े किए गए। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी से लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए। विपक्ष ने सरकार पर वैक्सीन आने में देरी लगाने से लेकर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया। लेकिन जब भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दी गई थी तब सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला ने एक बयान देकर कोवैक्सीन पर सवाल उठाया था। इसी साल तीन जनवरी को अदार पूनावाला ने अपने बयान में सिर्फ ऑक्सफोर्ड, मॉर्डना और फाइजर की वैक्सीन को सुरक्षित बताया था और अन्य को पानी की तरह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया था।
पूनावाला के इस बयान का उस दौरान विरोध भी हुआ था। भारत बायोटैक के डॉ. कृष्णा एल्ला ने कहा कि उन्हें ऐसे बयान की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा था कि हमने अपना काम ईमानदारी से किया है, लेकिन कोई हमारी वैक्सीन को पानी कहे तो बिल्कुल मंजूर नहीं होगा। हम भी वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने अपना काम किया है। कुछ लोगों के जरिए वैक्सीन का राजनीतिकरण किया जा रहा है। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कोरोना और वैक्सीन पर साधा था तंज
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कोरोना कुप्रबंधन और टीकाकरण को लेकर केंद्र सरकार को शुरू से घेरते आ रहे हैं। सबसे पहले 23 नवंबर 2020 को राहुल गांधी ने वैक्सीन पर शक करते हुए पीएम मोदी से चार सवाल पूछे थे। पहला- कोविड-19 वैक्सीन बनाने वाली सभी कंपनियों में से भारत सरकार ने किसे और क्यों चुना है ?
दूसरा- वैक्सीन किसे सबसे पहले दिया जाएगा और इसे लगाने की रणनीति क्या होगी ?
तीसरा- लोगों को मुफ्त में यह वैक्सीन उपलब्ध हो सके, क्या इसके लिए पीएम केयर फंड का इस्तेमाल किया जाएगा?
चौथा - कब तक सभी भारतीयों को यह वैक्सीन मिल जाएगा?
इतना ही नहीं कोरोना वैक्सीन की खुराक कम होने को लेकर भी राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा था। राहुल गांधी ने कहा था कि राज्यों के पास वैक्सीन लगाने के लिए पर्याप्त डोज नहीं है, लेकिन केंद्र वाहवाही लूटने के लिए आंकड़ों का खेल खेल रहा है।
ममता बनर्जी ने उठाया था सवाल
11 जनवरी 2021 को जब पीएम मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद कर रहे थे तब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वैक्सीन को लेकर चिंता जताई थी। ममता बनर्जी ने सवाल किया कि क्या केंद्र द्वारा दोनों टीकों (कोविशील्ड और कोवैक्सिन) को लेकर वैज्ञानिकों से पूरी जानकारी ली है। क्या टीकाकरण से पहले दोनों टीकों का ट्रॉयल किया गया। या फिर बिना ट्रॉयल ही आम लोगों पर इसकी शुरुआत की जा रही है। ममता ने कहा था कि वैक्सीनेशन से पहले पुख्ता अध्ययन की जरूरत है।
देश में वैक्सीनेशन को लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी फैली। इसमें बताया गया कि वैक्सीन लेने से इम्यून पावर कमजोर पड़ता है। साथ ही कई बीमारियां पैदा होती हैं। इस भ्रांतियों को लेकर आज भी लोग टीका लेने से बच रहे हैं।
16 जनवरी को हुई टीकाकरण की शुरुआत
भारत में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी को हुई थी। भारत में दो कंपनियों को टीका बनाने की मंजूरी मिली थी। इसमें एक पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशील्ड और हैदराबाद की भारत बायोटेक ने कोवावैक्सिन बनाया। कोविन ऐप के मुताबिक, 100 करोड़ में से 87.7 फीसदी हिस्सेदारी कोविशील्डकी रही है, जबकि 11.4 फीसदी कोवावैक्सिन की। वहीं, रूस की स्पूतनिक वैक्सीन लेने वालों की संख्या 0.5 फीसदी के करीब रही।