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India 16th Census: 25 साल में 17 गुना महंगा हुआ आबादी का हिसाब-किताब, जनगणना पर खर्च होंगे 11,718 करोड़

सार

देश की 16वीं जनगणना इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। 25 साल में इसका बजट करीब 17 गुना बढ़कर 11,718 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 15 साल बाद होने वाली यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल का इस्तेमाल होगा।

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जनगणना 2027 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश की 16वीं जनगणना इस बार न केवल तकनीकी रूप से हाईटेक होगी, बल्कि इसके बजट में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 25 साल पहले यानी साल 2001 में जिस जनगणना को कराने में 678 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, अब उसका अनुमानित खर्च बढ़कर 11,718 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इस बार के बजट में केंद्र सरकार इस भारी-भरकम धनराशि का बड़ा हिस्सा आवंटित कर सकती है, जिससे जनगणना कर्मियों के मानदेय, करोड़ों मार्गदर्शक पुस्तिकाओं की छपाई, वितरण और परिवहन जैसे कार्यों को गति दी जाएगी।

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15 साल के लंबे अंतराल के बाद होने वाली इस कवायद के लिए बाकी रकम का इंतजाम अगले साल के बजट में होगा। इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह डिजिटल होना है। मोबाइल ऐप, स्व-गणना पोर्टल और डेटा प्रबंधन प्रणालियों के सटीक संचालन के लिए सरकार ने पहली बार निजी क्षेत्र से तकनीकी सहयोग लेने का बड़ा फैसला किया है।

इसके लिए करीब डेढ़ साल के लिए निजी कर्मियों की सेवाएं ली जाएंगी। इन तकनीकी सहायकों और मल्टी-टास्किंग स्टाफ की नियुक्ति भले ही राज्य सरकारें करेंगी, लेकिन उनके वेतन का पूरा बोझ केंद्र सरकार उठाएगी। निजी क्षेत्र से आने वाले तकनीकी विशेषज्ञों को 25,000 रुपये और अन्य सहायक स्टाफ को 18,000 रुपये प्रति माह का मानदेय दिया जाएगा। ये कर्मी डिजिटल एप्लीकेशन के संचालन और डेटा प्रबंधन में सरकारी अधिकारियों की मदद करेंगे।
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जाति आधारित गणना भी शामिल 
राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने जाति आधारित डाटा को भी जनगणना में शामिल करने का फैसला किया है। यह पहली बार होगा कि जाति की गणना को पूरी तरह डिजिटल माध्यम से शामिल किया जाएगा। इससे सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के निर्माण में सटीक और व्यापक डेटा मिलेगा। सरकार का कहना है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में जाति संबंधी जानकारी सार्वजनिक योजनाओं की टारगेटिंग और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

30 लाख कर्मियों की होगी तैनाती
जनगणना 2027 में करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारी लगाए जाएंगे। इनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और कई तकनीकी कर्मचारी शामिल होंगे। यह जनगणना अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल ऑपरेशन होगा। इस दौरान लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिन का रोजगार भी पैदा होगा। फील्ड में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को उनके नियमित काम के अलावा यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और इसके लिए मानदेय भी तय किया गया है।

घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे
जनगणना करने वाले गणनाकार (एन्यूमरेटर), जो आमतौर पर सरकारी शिक्षक होते हैं, अपने टैबलेट या मोबाइल ऐप में घर-घर जाकर सभी जानकारी दर्ज करेंगे। हर घर का लोकेशन, सुविधाएं, परिवार के सदस्यों की शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, विकलांगता, प्रवासन और अन्य जरूरी विवरण रिकॉर्ड किए जाएंगे। ऐप में डाले जाने वाले डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी फीचर जोड़े गए हैं, ताकि कोई डेटा लीक या गड़बड़ी न हो।

लोग खुद भी भर सकेंगे फॉर्म
सरकार इस बार लोगों को स्वयं-गणना यानी सेल्फ इन्यूमरेशन का विकल्प भी देगी। लोग मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद भी भर सकेंगे। इससे प्रक्रिया तेज होगी और सिस्टम का भार कम होगा। जिन लोगों के पास मोबाइल या इंटरनेट नहीं है, उनके लिए फील्ड कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा दर्ज करेंगे।
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