वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार नए बोर्ड के फैसलों की समीक्षा करेगी। कॉरपोरेट मंत्रालय इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए बोर्ड को काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण फैसले लेने होंगे, जिससे विवाद और वाद प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आईएल एंड एफएस से जुड़े वित्तीय संकट के बारे में अभी सरकार को आंशिक जानकारी मिल रही है। सरकार को विशेषज्ञों और एजेंसियों के जरिये मिलने वाली ठोस तथा पूरी सूचना का इंतजार है। इसकी वजह यह है कि एसएफआईओ ने अपनी प्राथमिक जांच में विभिन्न संभावनाएं जताई हैं।
ऐसे में सरकार इसे वित्तीय अनियमितता और कुप्रबंधन का मामला मानकर चल रही है। अधिकारी ने कहा कि नए बोर्ड ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण समेत अन्य कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। सरकार इसमें सहायक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है।
अधिकारी ने कहा कि नए बोर्ड ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सहित अन्य कंपनियों से बातचीत शुरू कर दी है। सरकार इसमें सहायक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है। उल्लेखनीय है कि आईएलएंडएफएस के लिए गठित नया बोर्ड अगली बैठक 15 अक्तूबर से पहले कर सकता है। अभी तक की जानकारी और जांच के अनुसार नया बोर्ड एक स्वतंत्र जांच एजेंसी की नियुक्ति की मांग करेगा। इस मामले में ऑडिटिंग एवं फॉरेंसिक जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की नियुक्ति की जा सकती है।