- जहां भी तिरंगा लहराया जाए वहां से वह स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और उसे सम्मानपूर्वक स्थान दिया जाना चाहिए।
- सरकारी भवनों पर झंडा रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जा सकता है। विशेष अवसरों पर इसे रात के वक्त भी फहराया जा सकता है।
- तिरंगे को हमेशा सफूर्ति के लहराया जाना चाहिए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाना चाहिए।
- जब तिरंगे को किसी भवन की खिड़की, बालकनी या फिर अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो बिगुल की आवाज के साथ फहराया और उतारा जाना चाहिए।
- तिरंगे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है। उसे इस प्रकार फहराया जाना चाहिए कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो तिरंगा दाहिने ओर हो।
- झंडा अगर किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाता है तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाना चाहिए।
- झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका हुआ होना चाहिए।
- सांप्रदायिक लाभ, पर्दों या वस्त्रों के रूप में तिरंगे का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
- जहां तक संभव हो सके इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए।
- तिरंगे को आशय पूर्वक धरती, जमीन या पानी से स्पर्श नहीं कराना चाहिए।
- तिरंगे को वाहनों के ऊपर, बगल और पीछे, रेलों, नावों या वायुयान पर लपेटा नहीं जा सकता है।
- ध्वज को वंदनवार, ध्वज पट्ट या गुलाब के समान संरचना बनाकर उपयोग नहीं किया जा सकता।
- फटा या फिर मैला झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए।
- किसी दूसरे तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा या फिर उससे ऊपर नहीं लहराया जाना चाहिए और न ही उसके बराबर रखा जाना चाहिए।
- झंडे पर कुछ लिखा या फिर छपा हुआ नहीं होना चाहिए।