प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर पांच प्रण के साथ अगले 25 साल का पूरा खाका तैयार करके देश के सामने रखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद पीएल पुनिया कहते हैं कि प्रधानमंत्री का लाल किले से दिया गया भाषण पूरी तरीके से राजनैतिक था। वे कहते हैं कि इस राजनीतिक भाषण से भाजपा सत्ता का पूरा रोड मैप तैयार करने चली है। जबकि हकीकत यह है कि भाजपा ने 25 सालों के इस पूरे खाके की बात तो दूर, पंचवर्षीय योजना को भी पूरी तरीके से खत्म कर दिया है। इसके अलावा जिन शब्दों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर पर अपने देश के नागरिकों के उद्बोधन में दिया वह राजनैतिक ज्यादा है। वे कहते हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश के संबोधन को राजनीतिक रूप नहीं दिया जाना चाहिए।
खाका 2024 का नहीं 2047 तक का
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि जो लोग प्रधानमंत्री के भाषण को राजनीतिक भाषण करार देते हुए 2024 के चुनावी समर की बात करते हैं वह गलत कह रहे हैं। यह खाका 2024 का नहीं 2047 तक का है। लेकिन उनका कहना है कि यह कोई राजनैतिक खाका नहीं बल्कि देश को आगे ले जाने का एक विजन है। सुधांशु त्रिवेदी के मुताबिक महज राजनीति की बात करने वाले ही इसे राजनीतिक भाषण और राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं। उनका कहना है कि पूरी दुनिया में भारत सबसे युवा देश है। हमारे पास सबसे ज्यादा युवा आबादी है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से आह्वान किया कि अगले 25 साल में हमें देश को विकासशील से विकसित देश की श्रेणी में खड़ा करना है। उनका कहना है कि इसमें भी अगर कोई राजनीति तलाश कर रहा है तो क्या किया जा सकता है। रही बात परिवारवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की, तो यह मुद्दे राजनैतिक कैसे हो सकते हैं। जो सिस्टम हमारे देश को खोखला कर रहा हो, वह हमारे देश का सबसे बड़ा मुद्दा है। भाई-भतीजावाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहे हैं, दरअसल वो लोग खुद उस सिस्टम के हिस्से हैं।
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद/परिवारवाद हमेशा से चुनावी मुद्दा
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए उद्बोधन को लेकर राजनीतिक विश्लेषक जेएस कटारिया कहते हैं कि निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी का जो भाषण था, वह देश को अगली कतार में खड़े करने के प्रयासों को लेकर के ही है। लेकिन जिस तरीके से प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय भावना के साथ अगले 25 साल के विजन को लेकर चीजें रखी हैं, वह आज के राजनीतिक परिदृश्य में कम से कम भाजपा के लिहाज से पॉलिटिकली फिट भी हो रही हैं। वह कहते हैं बात जब राष्ट्रवाद की हो रही है तो उन्होंने हिंदी को अपनाने की बात कही। खास तौर से प्रधानमंत्री मोदी ने दो अहम बातें कहकर स्वतंत्रता दिवस के उद्बोधन को पूरी तरीके से बहस के मुद्दे में तो डाल ही दिया। ये अहम शब्द परिवारवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार है। कटारिया कहते हैं कि भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद/परिवारवाद हमेशा से चुनावी मुद्दे रहे हैं। ऐसे भी प्रधानमंत्री के उद्बोधन में जब ऐसे मुद्दे या नाम आएंगे तो निश्चित तौर पर उनके सियासी मायने तो तलाशे ही जाएंगे। कटारिया कहते हैं कि प्रधानमंत्री के 2047 के विजन पर जो लोग राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं वह निरर्थक है। हां, यह जरूर है कि चुनावी मंचों से दिए जाने वाले भाषणों में इस्तेमाल किए जाने वाले परिवारवाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को शामिल करना यह बताता है कि भाजपा निश्चित तौर पर राजनैतिक रोडमैप में इसे आकार दे रही है।
लाल किले के प्राचीर से मन की बात
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर दिए जाने वाले अपने उद्बोधन के दौरान इस बात का जिक्र किया कि वह जो बात यहां पर अब कहने जा रहे हैं उसके लिए लाल किले के प्राचीर से सही जगह नहीं हो सकती है। उन्होंने अपने मन की बात बताते हुए कहा कि देश में महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषक राजकुमार तोमर कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने जो बात लाल किले के प्राचीर से महिलाओं के सम्मान के लिए कही, उसके लिए उससे बेहतर स्थान और कोई नहीं हो सकता है। उनका कहना है कि जब पूरे देश और दुनिया की निगाहें प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर लगी हों, तो महिलाओं का सम्मान करने के लिए कहा जाने वाला यह वक्तव्य न सिर्फ देश को मजबूत करता है, बल्कि देश के बड़े विजन को भी प्रदर्शित करता है। लेकिन वह यह मानते हैं कि प्रधानमंत्री का आजादी के 75 साल पूरे होने पर दिया जाने वाला भाषण आगामी लोकसभा विधानसभा के चुनाव पर असर डालने वाला है। इसलिए इस उद्बोधन को राजनीति से अछूता नहीं माना जा सकता है।