देश आज 78वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल का पहला और 11वीं बार लाल किला के प्राचीर से तिरंगा फहराया। अब तक के सबसे लंबे अपने 98 मिनट के राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी उपलब्धिंया गिनाईं तो भविष्य की प्राथमिकताएं भी बताईं। इसी दौरान उन्होंने कहा कि पहले डिफेंस सेक्टर का बजट विदेश से रक्षा खरीदी में खर्च हो जाता था। हमारा देश बाहर से हथियारों का इंपोर्ट करता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज हम एक्सपोर्ट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह कथन बिल्कुल सही है कि भारत अब स्वदेश में बने हथियारों को दूसरे देशों को बेच रहा है। भारत वर्तमान में लगभग 85 देशों को सैन्य हार्डवेयर निर्यात कर रहा है, जिसमें लगभग 100 स्थानीय कंपनियां शामिल हैं। वहीं, भारत का लक्ष्य अगले 2028-29 तक तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग का केंद्र बन रहा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पहले रक्षा क्षेत्र के बजट का बड़ा हिस्सा विदेश से रक्षा खरीद में ही खर्च हो जाता था, लेकिन सरकार की नीतियों से अब स्थिति बदली है। अब भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ निर्यात कर रहा है और डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के केंद्र के तौर पर उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, अब हम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होते चले जा रहे हैं और हमारी एक पहचान बनी है। कई देशों में हम डिफेंस इक्विपमेंट्स एक्सपोर्ट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस स्थिति के लिए हमारी सेनाएं विशेष रूप से सराहना की पात्र हैं। सेनाओं ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की योजनाओं और पहलों का समर्थन करते हुए सहयोग किया है। रक्षा मंत्रालय ने सैकड़ों ऐसे उत्पादों की सूची तैयार की है, जिनके आयात पर पाबंदी लगायी जा रही है। इन उत्पादों का देश में उत्पादन बढाया जायेगा और धीरे-धीरे इनका आयात बिल्कुल बंद कर दिया जायेगा।
2024-25 की पहली तिमाही में रक्षा निर्यात 6,915 करोड़ रुपये
सरकार की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 10 सालों के दौरान नीतिगत पहलों और सुधारों की वजह से सैन्य निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, और आयात में गिरावट आई है। वहीं, इस साल अप्रैल-जून के दौरान भारत का रक्षा निर्यात 6,915 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 3,885 करोड़ रुपये के आंकड़े से 78 फीसदी अधिक है। जबकि पिछले साल की तरह ही इस साल भी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी क्रमशः 60 फीसदी और 40 फीसदी रही है। इस साल अप्रैल में रक्षा मंत्रालय ने एलान किया था कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत का रक्षा निर्यात 32.5 फीसदी बढ़ा और पहली बार 21,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया, क्योंकि सरकार का फोकस स्वदेशी डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम के साथ-साथ सैन्य निर्यात को बढ़ावा देने पर रहा।
निर्यात बढ़ाने में 100 घरेलू कंपनियों की अहम भूमिका
सैन्य सूत्रों ने बताया कि वित्त वर्ष 2023-34 में निर्यात की लागत पिछले साल की तुलना में 32.5 फीसदी अधिक थी, जो उस वक्त 15,920 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 10 सालों में रक्षा निर्यात 31 गुना बढ़ा है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि भारत फिलहाल लगभग 85 देशों को सैन्य साजो-सामान निर्यात कर रहा है। भारत के रक्षा निर्यात को आगे बढ़ाने में करीब 100 घरेलू कंपनियों ने अहम भूमिका निभाई है। ये कंपनियां हार्डवेयर में डोर्नियर-228, मिसाइल, तोपें, रॉकेट, बख्तरबंद वाहन, आर्टिलरी गन, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट, सिमुलेटर, ऑफशोर पेट्रोल वेसेल्स, पर्सनल प्रोटेक्टिव गियर्स, विभिन्न प्रकार के रडार, सर्विलांस सिस्टम और गोला-बारूद सहित कई तरह के सैन्य उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन निर्यातों ने शीर्ष 25 हथियार निर्यातक देशों में भारत की स्थिति को काफी मजबूत किया है, जो भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
2017 से भारत का रक्षा निर्यात 12 गुना से ज्यादा बढ़ा
22 जुलाई को लोकसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण- 2023-24 में भारत की रक्षा निर्यात उपलब्धियों का विस्तृत विश्लेषण पेश किया गया है। सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में अपना अब तक का सबसे अधिक रक्षा निर्यात दर्ज किया, जो कुल 20,915 करोड़ रुपये था। जो वित्त वर्ष 2022-23 से 25 फीसदी ज्यादा है। सर्वेक्षण में कहा गया है, वित्त वर्ष 2017 से भारत का रक्षा निर्यात 12 गुना से अधिक बढ़ गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक इसका श्रेय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को जाता है, जिसकी संख्या वित्त वर्ष 2023 में 1,414 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 1,507 हो गई है।
वहीं निर्यात बढ़ने के साथ भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन में भी पर्याप्त बढ़ोतरी दर्ज हुई है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में घरेलू उत्पादन लगभग 1.27 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 1.09 ट्रिलियन रुपये था, जिसमें 16.7 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
रक्षा मंत्रालय ने तैयार किया रोडमैप
रक्षा मंत्रालय ने इन उपलब्धियों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, यह छलांग विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के प्रति हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाती करती है, जो आत्मनिर्भरता और इनोवेशन में नए मानक स्थापित करती है। वहीं भारत का अगला लक्ष्य अगले पांच सालों यानी 2028-29 तक 50,000 करोड़ रुपये के अपने महत्वाकांक्षी रक्षा निर्यात लक्ष्य को पूरा करने का है। रक्षा मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी को बनाए रखने और रफ्तार देने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। जिसमें निर्यात किए जाने वाले प्रोडक्ट्स की रेंज का विस्तार करने और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।