'रेड वन, यू आर ऑन फायर'… स्क्वाड्रन लीडर धीरेंद्र जाफा के हेडफोन में अपने साथी पायलट फर्डी की आवाज सुनाई दी। दूसरे पायलट मोहन भी चीखे, 'बेल आउट रेड वन बेल आउट।' तीसरे पायलट जग्गू सकलानी की आवाज भी उतनी ही तेज थी, 'जेफ सर।।। यू आर।।।। ऑन फायर।।।। गेट आउट।।।। फॉर गॉड सेक।।।। बेल आउट।।'जाफा के सुखोई विमान में आग की लपटें उनके कॉकपिट तक पहुंच रही थीं। विमान उनके नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था। उन्होंने सीट इजेक्शन का बटन दबाया जिसने उन्हें तुरंत हवा में फेंक दिया और वो पैराशूट के जरिए नीचे उतरने लगे। जाफा बताते हैं कि जैसे ही वो नीचे गिरे नार-ए-तकबीर और अल्लाह हो अकबर के नारे लगाती हुई गाँव वालों की भीड़ उनकी तरफ दौड़ी।
लोगों ने उन्हें देखते ही उनके कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। किसी ने उनकी घड़ी पर हाथ साफ किया तो किसी ने उनके सिगरेट लाइटर पर झपट्टा मारा। सेकेंडों में उनके दस्ताने, जूते, 200 पाकिस्तानी रुपए और मफलर भी गायब हो गए। तभी जाफा ने देखा कि कुछ पाकिस्तानी सैनिक उन्हें भीड़ से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। एक लंबे चौड़े सैनिक अफसर ने उनसे पूछा, 'तुम्हारे पास कोई हथियार है?' जाफा ने कहा, 'मेरे पास रिवॉल्वर थी, शायद भीड़ ने उठा ली।'
'
क्या जख्मी हो गए हो?'
'लगता है रीढ़ की हड्डी चली गई है। मैं अपने शरीर का कोई हिस्सा हिला नहीं सकता।' जाफा ने कराहते हुए जवाब दिया। उस अफसर ने पश्तो में कुछ आदेश दिए और जाफा को दो सैनिकों ने उठा कर एक टेंट में पहुंचाया। पाकिस्तानी अफसर ने अपने मातहतों से कहा, इन्हें चाय पिलाओ।
जाफा के हाथ में इतनी ताक़त भी नहीं थी कि वो चाय का मग अपने हाथों में पकड़ पाते। एक पाकिस्तानी सैनिक उन्हें अपने हाथों से चम्मच से चाय पिलाने लगा। जाफा की आखें कृतज्ञता से नम हो गईं।
पाकिस्तानी जेल में राष्ट्र गान
जाफा की कमर में प्लास्टर लगाया गया और उन्हें जेल की कोठरी में बंद कर दिया गया। रोज उनसे सवाल-जवाब होते। जब उन्हें टॉयलेट जाना होता तो उनके मुंह पर तकिये का गिलाफ लगा दिया जाता ताकि वो इधर उधर देख न सकें। एक दिन उन्हें उसी बिल्डिंग के एक दूसरे कमरे में ले जाया गया।
जैसे ही वो कमरे के पास पहुंचे, उन्हें लोगों की आवाजें सुनाई देने लगीं। जैसे ही वो अंदर घुसे, सारी आवाजें बंद हो गईं। अचानक जोर से एक स्वर गूंजा, 'जेफ सर!'… और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिलीप पारुलकर उन्हें गले लगाने के लिए तेजी से बढ़े।
उन्हें दिखाई ही नहीं दिया कि जाफा की ढीली जैकेट के भीतर प्लास्टर बंधा हुआ था। वहाँ पर दस और भारतीय युद्धबंदी पायलट मौजूद थे। इतने दिनों बाद भारतीय चेहरे देख जाफा की आँखों से आंसू बह निकले। तभी युद्धबंदी कैंप के इंचार्ज स्क्वाड्रन लीडर उस्मान हनीफ ने मुस्कराते हुए कमरे में प्रवेश किया।