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अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकवाद ने बढ़ाई भारत की चिंता

Wed, 19 Sep 2018 09:49 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अफगानिस्तान में एक बार फिर आतंकवाद सिर उठा रहा है। अफगानिस्तान और पश्चिमी देश अफगानिस्तान में पिछले कुछ महीने के दौरान आईएसआईएस की जड़े गहराने का दावा कर रहे हैं। भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी का भी यही मानना है। हालांकि भारत का मानना है कि वहां विदेश लड़ाकों की मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन ये सब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोग हैं।

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अफगानिस्तान में इस तरह की हलचल ने भारत के साथ-साथ अमेरिका और चीन की भी चिंता बढ़ा दी है। चीन अफगानिस्तान में शांति, स्थायित्व चाहता है। माना जा रहा है कि इसके बाबत राष्ट्रपति घनी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच दीर्घकालिक उपाय को लेकर चर्चा होगी। फिलहाल अफगानिस्तान में दो तरह के डेवलेंप को लेकर भारत ज्यादा संवेदनशील है। इसके बाबत प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति घनी को अपनी चिंता से अवगत करा दिया है। भारत अफगानिस्तान में अपहृत अपने सात नागरिकों की सुरक्षित रिहाई चाहता है। राष्ट्रपति घनी ने प्रधानमंत्री को इसका पूरा भरोसा दिया है। राष्ट्रपति ने कहा है कि अफगानिस्तान भारत की चिंताओं को गंभीरता से लेकर संवेदनशील है। नागरिकों की सुरक्षित रिहाई के लिए उच्चस्तर पर प्रयास और संसाधन को लगाया जा रहा है। 

राष्ट्रपति घनी अपने साथ एक प्रतिनिधि मंडल लेकर भारत आए हैं। प्रतिनिधि मंडल में उनके वित्त मंत्री समेत कैबिनेट के दो मंत्री शामिल हैं। राष्ट्रपति घनी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच में अफगानिस्तान के ताजा हालात को देखते हुए आपसी हितों पर चर्चा करना, संबंधों, भारत के प्रयासों की समीक्षा करना तथा नये आयामों की दिशा काम करना है। इस चर्चा में गजनी में हुए आतंकी हमले को लेकर पैदा हुई चिंताएं शामिल हैं। 
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गजनी की आतंकी घटना में विदेशी आतंकियों की मौजूदगी बताई जा रही है। राष्ट्रपति घनी का कहना है कि अफगानिस्तान में पिछले कुछ महीने में अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएसआईएस ने अपनी पैठ बढ़ाई है। राष्ट्रपति घनी के मुताबिक अफगानिस्तान के सुरक्षा बल इस तरह की चुनौतियों से निबटने में सक्षम हैं। चर्चा के केंद्र में चीन और भारत के सहयोग से अफगानिस्तान के डिप्लोमैट को दिया जाने वाला संयुक्त प्रशिक्षण भी है। यह प्रशिक्षण अक्टूबर महीने के मध्य से दिल्ली में दिया जाना है। इसके बाद अफगानिस्तान के डिप्लोमाट बीजिंग में भी प्रशिक्षण हासिल करेंगे। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत अफगानिस्तान में अपने हितों की रक्षा के लिए तत्पर है। 

भारतीय कंपनियों ने वहां लगातार संसाधन के विकास में अपनी रुचि दिखाई है। राजधानी काबुल के पास पीने के साफ पानी की आपूर्ति में भारत रुचि ले रहा है। इसके अलावा अफगानिस्तान अपने यहां शरणार्थियों के लिए कम कीमत वाले मकान, सिंचाई और पावर की परियोजना में भारत की सहायता चाहता है। अफगानिस्तान अपने यहां के संगमरमर को तराशने और उन्हें भारत निर्यात किए जाने में भी नई दिल्ली का सहयोग चाहता है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति घनी की यात्रा के दौरान इन सभी विन्दुओं पर चर्चा होगी और कोई सकारात्मक हल निकालने का प्रयास होगा।

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