कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां चिकित्सीय सुविधा न के बराबर है। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक समूह गांवों में संक्रमण की स्थिति को लेकर आशंकित है।
हाऊ इंडिया लिव्स वेबसाइट ने सामुदायिक प्रसार की ओर इशारा किया है। 714 जिलों में संक्रमण के मामले हैं, इस आधार पर 94.76% आबादी संक्रमण के खतरे में हैं।
सीरो सर्वे और बढते आंकड़ों से पता चलता है कि छोटे शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक में वायरस मिल रहा है जो सामुदायिक प्रसार की ओर इशारा कर रहा है।
आईपीएच, इंडियन एसोसिएशन ऑफ एपिडिमियोलॉजिस्ट के एक समूह का कहना है, छह महीने बाद भी जो हालात हैं, वो डर चिंता और भेदभाव की स्थिति को बयां करते हैं।
वहीं जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस के प्रसार की क्या स्थिति है और कितने मामले हैं, कुछ स्पष्ट नहीं है।
ओडिशा में 60 फीसदी मामले गांवों से
चेन्नई इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज की प्रो. सिताभा सिन्हा के मुताबिक, आज सक्रिय मामलों में से अधिकतर मेट्रोपॉलिटन शहरों और उसके आसपास के क्षेत्रों में है।
आर वैल्यू यानी एक संक्रमित व्यक्ति से कितने लोग संक्रमित हो रहे हैं। इससे वायरस के प्रसार की रफ्तार का अंदाजा लगेगा। ओडिशा में अबतक जो मामले सामने आए हैं, उनमें 60 फीसदी मामले ग्रामीण इलाकों से हैं और इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है।