गत 20 वर्षों के दौरान नए बांधों के निर्माण की वजह से वैश्विक स्तर पर जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता में इजाफा तो हो रहा है लेकिन जलाशयों में मौजूद पानी की मात्रा लगातार घट रही है। इंटरनेशनल रजिस्टर ऑफ लार्ज डैम्स के मुताबिक वर्तमान में दुनियाभर में 58,713 बड़े बांध हैं, जिनमें से 4,407 भारत में हैं। अमेरिका में इनकी संख्या 9,263 और चीन में सबसे ज्यादा 23,841 है।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक यदि वैश्विक स्तर पर देखें तो कृत्रिम जलाशय पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है और आबादी बढ़ रही है इसकी वजह से जलशयों पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है। शोध के मुताबिक भारत में जिस तरह से आबादी बढ़ने के साथ पानी की मांग बढ़ रही है उसके कारण पैदा होने वाले तनाव को बड़े बांधों के जरिए भी दूर नहीं किया जा सकता। इसमें कोई शक नहीं की भारत के बड़े बांधों और जलाशयों ने जल प्रबंधन में अहम् भूमिका निभाई है लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि इनकी वजह से पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रति वर्ष 0.82% की दर से घट रहा जलाशयों का जलस्तर
वैश्विक स्तर पर जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता सालाना 27.82 लाख क्यूबिक मीटर प्रति किलोमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है, लेकिन जलाशयों का भंडारण 0.82 फीसदी की दर से प्रति वर्ष घट रहा है। गिरावट की गणना कुल भंडारण क्षमता के अनुपात में की गई है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 1999-2022 के बीच 7,245 जलाशयों के भंडारण का अनुमान लगाने के लिए उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों की मदद ली। इस अध्ययन में भारत के लगभग 45 बड़े बांधों को शामिल किया गया।
देश के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से कराई गई जलाशयों की पहली गणना के अनुसार जलाशयों पर अतिक्रमण भी बड़े बांधों के गिरते जल स्तर के लिए जिम्मेदार है। गांवों में 37,007 जलाशयों पर अतिक्रमण है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 1,784 बड़े जलाशय ऐसे हैं जो अवैध कब्जों का शिकार हैं। यानी देश में 38,791 जलाशय ऐसे हैं, जिन्हें लगभग पूरी तरह हड़प लिया गया है।