फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Goa : 'मुकदमों में वृद्धि होना लोगों के विश्वास को दर्शाता है', संविधान दिवस समारोह में बोले जस्टिस बिंदल

Wed, 29 Nov 2023 04:01 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी

सार

उन्होंने कहा, 'यदि प्रत्येक मामले में पार्टियों की औसत संख्या चार मानी जाए और प्रत्येक पार्टी के परिवार के सदस्यों की औसत संख्या चार ली जाए, तो लंबित मामलों से प्रभावित लोगों की कुल संख्या पांच करोड़ होगी, चार से दो बार गुणा करने पर यह 80 करोड़ हो जाएगी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने मंगलवार को कहा कि मुकदमेबाजी में वृद्धि से किसी को निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि यह देश की कानूनी व्यवस्था में लोगों के विश्वास को दर्शाती है। 

विज्ञापन


गोवा में इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईयूएलईआर) में संविधान दिवस समारोह के हिस्से के रूप में एक व्याख्यान देते हुए न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा कि देश में सिविल अदालतों में लगभग पांच करोड़ मामले लंबित हैं, जिनमें जिला अदालतों में 4.2 करोड़ मामले, उच्च न्यायालयों में लगभग 60 लाख और उच्चतम न्यायालय में 70 हजार मामले शामिल हैं।  यह मामले किसी न किसी रूप में देश के
अधिकतर लोगों से जुड़े हैं। न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा कि कानून से जुड़े लोगों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, 'यदि प्रत्येक मामले में पार्टियों की औसत संख्या चार मानी जाए और प्रत्येक पार्टी के परिवार के सदस्यों की औसत संख्या चार ली जाए, तो लंबित मामलों से प्रभावित लोगों की कुल संख्या पांच करोड़ होगी, चार से दो बार गुणा करने पर यह 80 करोड़ हो जाएगी। फिर इन मामलों से बड़ी संख्या में गवाह भी जुड़े हैं'।
विज्ञापन


लगभग हर किसी के जीवन से जुड़ी है कानूनी बिरादरी
न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में यह संख्या बताती है कि कानूनी बिरादरी लगभग हर किसी के जीवन से जुड़ी हुई है। न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा कि कानूनी बिरादरी की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और किसी को भी बढ़ती मुकदमेबाजी से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह देश की कानूनी व्यवस्था में लोगों के विश्वास को भी दर्शाता है।

संविधान के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमारे समय की एक बड़ी समस्या यह है कि हममें से कई लोगों ने यह नहीं पढ़ा होगा कि इसमें नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों के बारे में क्या कहा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें