केंद्र सरकार ने नौ मैतेई चरमपंथी समूहों और उनके सहयोगी संगठनों पर पांच साल का एक और प्रतिबंध लगाने के फैसले पर विचार के लिए एक न्यायाधिकरण का गठन किया। इसमें गौहाटी हाईकोर्ट के जज जस्टिस संजय कुमार मेधी को भी शामिल किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की यह घोषणा देश विरोधी गतिविधियों और सुरक्षा बलों पर घातक हमले करने के लिए मैतेई चरमपंथी समूहों और उनके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध बढ़ाने के एक पखवाड़े बाद आई है।
गृह मंत्रालय से जारी बयान में कहा गया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (1967 का 37) की धारा 5 की उपधारा (1) में दी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) न्यायाधिकरण का गठन किया है। न्यायाधिकरण यह तय करेगा कि मणिपुर के मैतेई चरमपंथी संगठनों के साथ-साथ उनके गुटों, शाखाओं और प्रमुख संगठनों को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं।
इन चरमपंथी समूहों और उनके सहयोगी संगठनों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जिसे आम तौर पर पीएलए के नाम से जाना जाता है, और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा, मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए) शामिल हैं। इनके अलावा पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) और इसकी सशस्त्र शाखा, ‘रेड आर्मी’, कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) आदि शामिल हैं।