कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अनाज उत्पादन से ज्यादा बड़ी समस्या उसके भंडारण और आपूर्ति की है। इसी कारण हर साल लाखों टन अनाज खराब हो जाता है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में शेष अनाज को इतनी खराब स्थिति में संग्रहीत किया जाता है कि कटाई के बाद अनाज का 10 फीसदी नुकसान होता है, जिसमें से 6 फीसदी (करीब 18 लाख टन) भंडारण के अभाव में खराब होता है।
इससे न सिर्फ वितरण हुए अनाज की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि किसानों को भी पर्याप्त मूल्य नहीं मिल पाता। सरकार ने कृषि ढांचे में सुधार के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है, जिसमें भंडारण और आपूर्ति की व्यवस्था को प्रमुखता से लिया गया है।
सब्सिडी से बेहतर होगी फल-सब्जियों की आपूर्ति
वित्तमंत्री ने ऑपरेशन ग्रीन के तहत सभी फल और सब्जियों को सब्सिडी युक्त आपूर्ति की व्यवस्था का एलान किया है। इसका मतलब है कि अधिक उत्पादन वाले इलाकों से कम उत्पादन वाली जगहों पर इनकी आपूर्ति, भंडारण और परिवहन के खर्च पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी।
अभी तक यह योजना टमाटर, आलू-प्याज जैसी सब्जियों पर ही लागू थी लेकिन इसका दायरा बढ़ाए जाने से पूरे देश में इन उत्पादों की बेहतर पहुंच आसान होगी। दरअसल, अभी तक आपूर्ति व भंडारण पर आने वाले खर्च के दबाव में ये उत्पाद उन्हीं जगहों तक सीमित रह जाते थे, जहां इनका ज्यादा उत्पादन होता है। इससे एक तो इनके खराब होने की आशंका रहती थी, दूसरे उत्पादकों को वाजिब दाम भी नहीं मिल पाता था।